Himachal Pradesh University के हिंदी विभाग द्वारा 23 मई 2026 को “उच्च शिक्षण संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता एवं POSH एक्ट, 2013” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ. भवानी सिंह के निर्देशन में निरंतर व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विधि विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. रूना मेहता ठाकुर उपस्थित रहीं, जबकि व्याख्यान सत्र का संयोजन डॉ. सुनीता ठाकुर ने किया। इस अवसर पर डॉ. शोभा रानी, डॉ. नरेश कुमार सहित विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।


कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुनीता ठाकुर के स्वागत भाषण से हुई। अपने संबोधन में प्रो. रूना मेहता ठाकुर ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्यस्थल उपलब्ध कराना हर संस्थान का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और समान अवसर वाला वातावरण प्रत्येक महिला का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना समाज तथा संस्थानों की जिम्मेदारी है।


व्याख्यान के दौरान उन्होंने “विशाखा गाइडलाइंस” और POSH एक्ट, 2013 की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 29 का उल्लेख करते हुए महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने POSH एक्ट के प्रमुख नियमों, शिकायत निवारण प्रक्रिया और “इंटरनल कंप्लेंट कमेटी” (ICC) तथा “लोकल कंप्लेंट कमेटी” (LCC) की भूमिका को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाया।


प्रो. रूना मेहता ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की अनुचित टिप्पणी, मानसिक उत्पीड़न, आपत्तिजनक संकेत या अवांछित व्यवहार यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है और इसके खिलाफ तुरंत आवाज उठाना जरूरी है। व्याख्यान के अंत में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विषय से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया। यह पूरा सत्र विद्यार्थियों के लिए काफी जागरूकतापूर्ण और ज्ञानवर्धक साबित हुआ।
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