Himachal Govt की बड़ी पहल: टाइप-1 डायबिटीज मरीजों को फ्री मिल रहा इंसुलिन पंप, अब नहीं लगेंगे रोज इंजेक्शन

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हिमाचल प्रदेश सरकार और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत एक सराहनीय पहल शुरू की गई है, जिसके तहत टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों और 27 वर्ष तक के युवाओं को अत्याधुनिक इंसुलिन पंप मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल से मरीजों की जीवनशैली में बड़ा सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इंसुलिन पंप के उपयोग से अब मरीजों को दिन में कई बार सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जहां पहले रोजाना 4 से 5 बार इंजेक्शन लगाना पड़ता था, अब 2 से 3 दिन में केवल एक बार प्रिक की आवश्यकता होती है। यह तकनीक न केवल दर्द को कम करती है, बल्कि मरीजों को ज्यादा स्वतंत्र और सहज जीवन जीने में मदद करती है। यह डिवाइस शरीर में इंसुलिन की मात्रा को सटीक रूप से नियंत्रित करता है, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया और हाइपरग्लाइसीमिया जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

इंसुलिन पंप एक छोटे मोबाइल फोन जैसा उपकरण होता है, जिसमें पतली ट्यूब और कैनुला लगा होता है। इसे शरीर पर लगाया जाता है और इसके सॉफ्टवेयर में मरीज की जरूरत के अनुसार इंसुलिन की मात्रा सेट कर दी जाती है, जो लगातार शरीर में पहुंचती रहती है। बाजार में इसकी कीमत लगभग 3 लाख से लेकर 6.5 से 7 लाख रुपए तक होती है, जबकि इसके रखरखाव पर हर महीने 4 से 5 हजार रुपए खर्च आते हैं। लेकिन हिमाचल सरकार इस पूरी लागत को वहन कर रही है और पात्र मरीजों को यह सुविधा निशुल्क दे रही है।

प्रदेश के टांडा मेडिकल कॉलेज, आईजीएमसी शिमला और एम्स बिलासपुर जैसे प्रमुख संस्थानों में अब तक करीब 50 मरीज इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजी एवं मेटाबॉलिज्म विभागाध्यक्ष डॉ. विनय डोगरा ने बताया कि इंसुलिन पंप एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है, जो लंबे समय से उपयोग में है। उन्होंने कहा कि यह मरीजों की दिनचर्या में ज्यादा बाधा नहीं डालता और इसे इस्तेमाल करना समय के साथ आसान हो जाता है। यह पहल मरीजों को न केवल बेहतर स्वास्थ्य देगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी जीवन जीने में भी मदद करेगी।

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