हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़े स्तर पर भर्ती की तैयारी कर रहा है। विभाग में 300 डॉक्टरों और 200 नर्सों की भर्ती की जा रही है। सरकार ने वर्ष 2027 तक स्वास्थ्य विभाग के सभी रिक्त पदों को भरने का लक्ष्य रखा है। नई भर्ती की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि डॉक्टरों को डेपुटेशन पर भेजने के बजाय सीधे जरूरत वाले स्वास्थ्य संस्थानों में तैनाती दी जाएगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की उम्मीद है।
विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद डॉक्टरों और नर्सों की भर्ती का प्रस्ताव कमीशन को भेजा जाएगा। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। आदर्श अस्पतालों और सामुदायिक अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। जिन अस्पतालों में छह डॉक्टर नहीं हैं, वहां छह स्पेशलिस्ट की तैनाती की जाएगी। विभाग का मानना है कि पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध होने से मरीजों को प्राथमिक स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकेगा और उन्हें छोटी-छोटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से डॉक्टरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर डेपुटेशन पर भेजने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई बार ग्रामीण अस्पतालों से डॉक्टरों को डेपुटेशन पर भेजे जाने के बाद स्थानीय मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब सरकार का जोर नए डॉक्टरों की तैनाती सीधे जरूरत वाले स्वास्थ्य संस्थानों में करने पर है। इससे पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंह मार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कमीशन के माध्यम से 300 डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है। इसके अलावा नर्सों की भी भर्ती होनी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।




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