हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से तिब्बती युवा कांग्रेस (टीवाईसी) ने तिब्बत से जुड़े मुद्दों को लेकर एक वैश्विक विरोध अभियान की शुरुआत की है। अभियान के तहत संगठन ने 24 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल आयोजित कर तिब्बत के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की कथित निष्क्रियता और चीन की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। टीवाईसी का कहना है कि यह अभियान केवल धर्मशाला तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में उन देशों में भी चलाया जाएगा जहां संगठन की इकाइयां सक्रिय हैं।

तिब्बती सांसद और तिब्बती युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गोम्पो धोंडुप ने बताया कि यह भूख हड़ताल हाल ही में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर आत्मदाह करने वाले एक तिब्बती आंदोलनकारी को श्रद्धांजलि देने और उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों के समर्थन में आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य तिब्बत के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है। उनके अनुसार, धर्मशाला से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर विभिन्न देशों तक पहुंचेगा और इसमें तिब्बती संगठनों के साथ-साथ आम लोगों की भी भागीदारी होगी।

तिब्बती युवा कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष लोबसांग त्सेरिंग ने इस दौरान चीन की नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि तिब्बती संस्कृति और पहचान पर लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का यह विरोध कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर जारी रहेगा और विभिन्न देशों में स्थित टीवाईसी की शाखाएं इसमें भाग लेंगी।

संगठन के महासचिव तेनजिन लोबसांग ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की कथित चुप्पी और तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने तिब्बत में कड़ी निगरानी व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के आरोप भी लगाए। टीवाईसी का मानना है कि इस अभियान के माध्यम से तिब्बती समुदाय की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाया जा सकेगा।
वहीं, चीन इन आरोपों को खारिज करता रहा है और तिब्बत में विकास कार्यों तथा क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को अपनी नीतियों का प्रमुख उद्देश्य बताता है।

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