चंबा में दर्दनाक बस हादसा: तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर 18 सवारियों से भरी बस खाई में गिरी, 7 की मौत; 11 घायल

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चंबा, 9 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में बरसात के मौसम के दौरान पहाड़ी सड़कों पर सफर एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। चंबा जिले में तीसा-बैरागढ़ मुख्य सड़क पर चालुज मोड़ के समीप शनिवार सुबह यात्रियों से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी। हादसे में चालक और परिचालक समेत सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल हुए हैं।

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जानकारी के अनुसार निजी बस संख्या HP-7A-2101 शनिवार सुबह करीब 7 बजे बैरागढ़ से 18 सवारियों को लेकर चंबा की ओर जा रही थी। चालुज मोड़ के पास बस का स्टीयरिंग एंड टूट गया, जिसके कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस सड़क से नीचे जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को उपचार के लिए तीसा अस्पताल पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी 11 घायलों को मेडिकल कॉलेज चंबा रेफर किया गया। बाद में तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जबकि आठ घायल चंबा मेडिकल कॉलेज में ही भर्ती हैं।

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हादसे में इन सात लोगों की गई जान

हादसे में जगदेव शर्मा (50) पुत्र धर्म सिंह, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह, देस राज (35) पुत्र त्रिलोचन, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह, तेज सिंह (39) पुत्र प्यारे लाल, परिचालक, निवासी गांव सत्यास, डाकघर तरेला, तहसील चुराह, जगदेई (24) पुत्री हरि लाल, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह, हरदेई (43) पत्नी जगदेव, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह, नीलम (34) पत्नी मोती सिंह, निवासी डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह और रूप सिंह (35) पुत्र राधा राम, चालक, निवासी गांव चिल्ली, डाकघर थल्ली, तहसील चुराह की मौत हुई है।

बरसात में पहाड़ी सड़कें बनीं बड़ा खतरा

हिमाचल प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। बरसात के दौरान पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन, पहाड़ियों से गिरते पत्थर, सड़क धंसने और गहरी खाइयों के कारण खतरा और बढ़ जाता है। चंबा का यह हादसा भी पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था और सड़क की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

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हिमाचल के बड़े जानलेवा सड़क हादसे

24 जुलाई 2026 को कुल्लू से पांगी जा रही एक टैक्सी पहाड़ी दरकने से मलबे की चपेट में आ गई थी। इस हादसे में 13 लोगों की जान चली गई।

18 जून 2026 को चंबा के मसरूंड में बोलेरो वाहन करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिर गया था। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।

11 मई 2026 को ककीरा में चंबा-नूरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पर्यटकों से भरी इनोवा दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में छह लोगों की मौत हुई थी।

4 मई 2026 को सिरमौर में कार के खाई में गिरने से चार लोगों की जान गई थी।

9 जनवरी 2026 को सिरमौर के शिलाई-कुपवी मार्ग पर निजी बस करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी। हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी।

20 जून 2024 को शिमला जिले के जुब्बल स्थित चोरी कैंची में एचआरटीसी बस पलटने से चार लोगों की मौत हुई थी।

20 जून 2017 को शिमला के नेरवा में हुए एचआरटीसी बस हादसे में 44 यात्रियों की जान चली गई थी।

13 अगस्त 2013 को चंबा के चुवाड़ी में निजी बस दुर्घटना में 41 लोगों की मौत हुई थी।

3 अक्तूबर 2012 को मंडी के जोगिंद्रनगर में बस खाई में गिरने से 46 लोगों की मौत हुई थी।

5 नवंबर 2012 को किन्नौर के टापरी के पास बस सतलुज नदी में समा गई थी, जिसमें 42 लोगों की जान चली गई थी।

2 जनवरी 2010 को बिलासपुर में हुए निजी बस हादसे में 31 लोगों की मौत हुई थी।

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हादसे की होगी मजिस्ट्रेट जांच

चांजू में हुए इस बस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एडीएम चंबा अमित मेहरा ने हादसे के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए संबंधित एसडीएम चुराह को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपने को कहा गया है।

मजिस्ट्रेट जांच के दौरान हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इसमें दुर्घटना के संभावित कारणों, हादसे की परिस्थितियों और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों को जांच प्रक्रिया पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभावित परिवारों को घरद्वार मिलेगी राहत

प्रशासन की ओर से हादसे में प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। तहसीलदार चुराह को निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रभावित परिवारों से संपर्क करें और उन्हें नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि घरद्वार जाकर उपलब्ध करवाएं।

जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जा सके।

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