हिमाचल प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से सांसद Rajeev Bhardwaj द्वारा अपनी ही पार्टी के एक पूर्व मंत्री पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और गद्दारी के आरोप लगाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच अब यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि पार्टी अनुशासन और निष्ठा की बात की जा रही है, तो फिर शाहपुर में कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर चुप्पी क्यों साधी जा रही है।
क्षेत्र में चर्चाएं इस बात को लेकर भी तेज हैं कि सांसद के करीबी माने जाने वाले शाहपुर के एक भाजपा नेता पर पार्टी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी विरोध केवल चुनिंदा नेताओं तक ही सीमित माना जा रहा है, जबकि कुछ लोगों को राजनीतिक समीकरणों और मित्रता के चलते नजरअंदाज किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी हित सर्वोपरि हैं, तो अनुशासन और कार्रवाई के मापदंड भी सभी नेताओं के लिए समान होने चाहिए। शाहपुर क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उक्त नेता की राजनीतिक गतिविधियां क्या रहीं और उस समय पार्टी को कितना नुकसान उठाना पड़ा।
जनता के बीच अब यह सवाल खुलकर उठने लगे हैं कि क्या राजनीतिक मित्रता के चलते कुछ नेताओं को संरक्षण दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि पार्टी विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई की बात हो रही है, तो वह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। अन्यथा इस तरह के बयान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित माने जाएंगे।
राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में भाजपा के भीतर इस मुद्दे को लेकर और अधिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच भी इस विषय को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!
Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!