Himachal: दिव्यांगता, बीमारी और गरीबी की तिहरी मार: बिलासपुर का यह परिवार मुख्यमंत्री से मदद की लगा रहा गुहार

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हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर की ग्राम पंचायत जुखाला के गांव आशा मजारी में रहने वाला एक परिवार ऐसा है, जिसके लिए हर दिन संघर्ष से भरा है। दिव्यांगता, गंभीर बीमारी और घोर आर्थिक तंगी ने इस परिवार की जिंदगी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। वर्षों से दर्द और अभाव झेल रहे निक्कू राम और उनके परिजनों ने अब आखिरी उम्मीद के तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजकर मानवीय सहायता की अपील की है।

करीब 32 साल पहले एक हादसे ने निक्कू राम की पूरी जिंदगी बदल दी। कभी कुशल बढ़ई के रूप में परिवार का पालन-पोषण करने वाले निक्कू राम मकान निर्माण के दौरान ऊंचाई से गिर गए, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई। इसके बाद वे 7 से 8 साल तक बिस्तर पर पड़े रहे। आज उनकी दिव्यांगता 70 प्रतिशत है और वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

संघर्ष यहीं खत्म नहीं होता। उनकी पत्नी सवित्री देवी मानसिक रोग से पीड़ित हैं और 77 प्रतिशत दिव्यांग हैं। वे पूरी तरह लकवाग्रस्त हैं और बिस्तर से उठ नहीं सकतीं। दर्दनाक सच्चाई यह है कि खुद चलने में असमर्थ निक्कू राम को ही दिन में दो बार पत्नी की मालिश करनी पड़ती है, ताकि उनका शरीर अकड़ न जाए।

कुदरत की मार बच्चों पर भी पड़ी है। बड़ा बेटा विजय कुमार मानसिक रूप से विक्षिप्त है और 85 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रहा है। उसे भी लगातार देखभाल की जरूरत रहती है। छोटा बेटा राजकुमार दृष्टिबाधित है और उसकी कमर में प्लेट लगी हुई है, जिसके कारण वह कोई भारी काम नहीं कर सकता और आजीविका कमाने में असमर्थ है।

परिवार के पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। हालांकि उनके पास 5 से 6 बीघा जमीन है, लेकिन चारों ओर चीड़ का जंगल होने के कारण खेती संभव नहीं हो पाती। परिवार का गुजारा सहारा योजना की पेंशन से हो रहा था, लेकिन पिछले 6 से 7 महीनों से वह भी बंद है। निक्कू राम के अनुसार घर में हर महीने केवल दवाइयों पर ही 18 से 19 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं, जबकि कई बार मोबाइल रिचार्ज तक के पैसे नहीं होते।

मुख्यमंत्री को भेजे गए भावुक ज्ञापन में निक्कू राम ने लिखा है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो परिवार का जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा। उन्हें पितृ दोष निवारण के लिए बिहार के गया जी जाने की सलाह दी गई है, लेकिन इसके लिए करीब 50 हजार रुपये का खर्च उनकी पहुंच से बाहर है। पीड़ित परिवार ने सरकार से नियमों से परे जाकर मानवीय आधार पर मदद की गुहार लगाई है।

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