ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के तहत ग्राम पंचायत भाली में इस बार पंचायत चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा, बल्कि दोस्ती, भरोसे और मजबूत रणनीति की ऐसी कहानी बन गया जिसकी चर्चा अब पूरे हिमाचल प्रदेश में हो रही है। 26 मई को हुए पंचायत चुनाव में दो दोस्तों की जोड़ी ने ऐसा इतिहास रच दिया कि बड़े-बड़े राजनीतिक चेहरे भी हैरान रह गए।
पंचायत प्रधान पद के उम्मीदवार अमन राणा ने कुल 1830 मतों में से रिकॉर्ड 1364 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कई बार पंचायत प्रधान रह चुके मुंशी राम को करीब 898 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में मुंशी राम को केवल 466 वोट ही मिल सके। हालांकि, इस जीत के पीछे सिर्फ अमन राणा का नाम नहीं, बल्कि उनके करीबी मित्र जितेंद्र धीमान “जीतू” की भूमिका भी बराबरी से चर्चा में रही।
अमन राणा और जितेंद्र धीमान की दोस्ती लंबे समय से क्षेत्र में मिसाल मानी जाती है। जितेंद्र धीमान छात्र राजनीति और युवा कांग्रेस में सक्रिय रह चुके हैं। वह एनएसयूआई कांगड़ा जिला अध्यक्ष और युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव जैसे अहम पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। जब जीतू राजनीति में सक्रिय थे, तब अमन राणा हर समय उनके साथ खड़े नजर आते थे। इस बार जब भाली पंचायत में प्रधान पद अनारक्षित हुआ, तो जीतू ने ही अमन राणा को चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में इस चुनाव को सामान्य मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों दोस्तों की रणनीति ने पूरा चुनावी माहौल बदल दिया। इस चुनाव की सबसे खास बात उनकी सादगी रही। न कोई बड़ा काफिला, न भीड़ दिखाने की राजनीति और न ही कोई बड़ा दिखावा। दोनों दोस्तों ने गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात की, हर परिवार तक पहुंचे और लोगों की समस्याएं सुनीं। यही वजह रही कि धीरे-धीरे पूरा माहौल उनके पक्ष में बनता चला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस चुनाव में पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि कोई उम्मीदवार केवल वोट मांगने नहीं, बल्कि रिश्ते बनाने आया है। भाली पंचायत में मिली यह ऐतिहासिक जीत अब पूरे ज्वाली क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि युवाओं की नई सोच, सादगी और दोस्ती की ताकत की जीत मान रहे हैं।
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