हमीरपुर के सुजानपुर नगर परिषद में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग सामग्री को अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट बाघा तक पहुंचाने के लिए किए गए 1,56,016 रुपये के भुगतान पर ऑडिट ने सवाल उठाए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में हुए समझौते के तहत सीमेंट की आपूर्ति के बाद वापस लौटने वाले ट्रकों की खाली क्षमता से प्लास्टिक कचरे की निशुल्क ढुलाई का प्रावधान था। इसके बावजूद नगर परिषद ने एक निजी फर्म से प्लास्टिक कचरे का परिवहन करवाया और 14 चक्करों के लिए भुगतान किया।
सुजानपुर से सीमेंट प्लांट बाघा तक प्लास्टिक कचरे की निशुल्क ढुलाई होनी थी, लेकिन इसके बावजूद एक फर्म को 1.56 लाख रुपये का भुगतान किया गया। यह मामला नगर परिषद सुजानपुर में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग सामग्री के परिवहन से जुड़ा है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बाघा के साथ शहरी निकायों के समझौता ज्ञापन के अनुसार प्लास्टिक कचरे की निशुल्क ढुलाई की जानी थी। नगर परिषद की अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की ऑडिट रिपोर्ट ने इस मामले में दुर्विनियोजन की आशंका जताई है।
ऑडिट ने इस भुगतान को नगर परिषद पर अनावश्यक और अनधिकृत वित्तीय भार बताते हुए राशि की वसूली करने को कहा है। अंकेक्षण के दौरान चार मार्च 2025 के वाउचर संख्या 1176 की जांच में सामने आया कि नगर परिषद ने मैसर्स न्यू प्रेम रोड लाइन को सुजानपुर से अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट बाघा तक प्लास्टिक रिसाइक्लिंग सामग्री पहुंचाने के लिए 1,56,016 रुपये का भुगतान किया। यह भुगतान दो बिलों के आधार पर 14 ट्रिप के लिए किया गया था।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, आठ दिसंबर 2023 को अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड और हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के बीच हुए एमओयू की धारा बी (10) में प्रावधान था कि सीमेंट की आपूर्ति के बाद वापस लौटने वाले ट्रकों की बैकलोड क्षमता से प्लास्टिक कचरे का परिवहन निशुल्क किया जाएगा। इसके बावजूद नगर परिषद ने प्लास्टिक कचरे के परिवहन के लिए निविदा आमंत्रित कर दी। निविदा में परिवहन की दर सभी करों समेत 9,950 रुपये प्रति ट्रिप निर्धारित की गई थी। 14 ट्रिप के लिए 1,39,300 रुपये का भुगतान बनता था, लेकिन नगर परिषद ने 12 प्रतिशत अतिरिक्त जीएसटी के रूप में 16,716 रुपये जोड़कर कुल 1,56,016 रुपये का भुगतान कर दिया। ऑडिट ने अतिरिक्त जीएसटी के भुगतान पर भी आपत्ति दर्ज की है।
अल्ट्राटेक के वाहनों से ही भेजा गया प्लास्टिक कचरा
ऑडिट के दौरान नगर परिषद की ओर से अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को भेजे गए पत्रों की भी जांच की गई। इन पत्रों में स्पष्ट उल्लेख था कि प्लास्टिक कचरा अल्ट्राटेक के प्लांट की ओर से उपलब्ध करवाए गए वाहनों में ही भेजा गया। 28 अगस्त से 22 नवंबर 2024 के बीच भेजे गए 14 पत्रों में संबंधित वाहनों के नंबर भी दर्ज हैं। ऐसे में ऑडिट के अनुसार, परिवहन का खर्च नगर परिषद को वहन नहीं करना था।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले को अंकेक्षण अधियाचना संख्या 2025-26/64 के माध्यम से 19 नवंबर 2025 को नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी के ध्यान में लाया गया था। हालांकि, ऑडिट समाप्त होने तक नगर परिषद की ओर से इस मामले में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी हर्षित शर्मा ने कहा कि सीमेंट प्लांट कई बार चालू नहीं होता है, ऐसी स्थिति में नगर परिषद के पास कोई चारा नहीं बचता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। जब प्लास्टिक कचरा ज्यादा हो जाता है तो ऐसी व्यवस्था की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण विधायन करके परिवहन के लायक प्लास्टिक सामग्री तैयार भी नहीं हो पाती है।



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