डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल टांडा के कार्डियोलॉजी विभाग में पिछले कुछ समय में हुई जांच की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान (डीएमई) को भेजे गए एक पत्र में संबंधित पक्ष ने जांच कमेटी की कार्यप्रणाली को पक्षपातपूर्ण और गैर निष्पक्ष बताते हुए कई गंभीर आपत्तियां दर्ज करवाई हैं।
15-16 जुलाई और 12-14 अगस्त को हुई थी जांच
पत्र के अनुसार कार्डियोलॉजी विभाग के कामकाज से संबंधित जांच 15-16 जुलाई और 12-14 अगस्त 2026 को हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जांच कमेटी ने विभाग के सदस्यों के मौखिक बयानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया और लगभग हर मामले में दस्तावेजी साक्ष्यों पर ही अधिक जोर दिया गया।
पत्र में कहा गया है कि कार्डियोलॉजी विभाग के अधिकांश दस्तावेज तत्कालीन विभागाध्यक्ष के कब्जे में थे। इनमें से कई दस्तावेज उनके निर्देशन या निगरानी में तैयार किए गए थे। इसी आधार पर जांच के दौरान पेश किए गए कुछ रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिकॉर्ड में बदलाव या छेड़छाड़ की आशंका
शिकायत में आशंका जताई गई है कि कुछ दस्तावेजों में बदलाव अथवा छेड़छाड़ की संभावना हो सकती है। इसी को देखते हुए संबंधित रिकॉर्ड को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
शिकायत में इको रजिस्टर, कैथ लैब रजिस्टर और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी रोस्टर का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार ये रिकॉर्ड तत्कालीन विभागाध्यक्ष और संबंधित वार्ड सिस्टर के पास थे। ऐसे में यह जांचने की मांग की गई है कि रिकॉर्ड में किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या नहीं।
रेडिएशन एक्सपोजर से जुड़ी बीमारी का भी मुद्दा
शिकायत में एक फैकल्टी सदस्य की रेडिएशन एक्सपोजर से जुड़ी बीमारी और भविष्य में रेडिएशन के संपर्क में आने से बढ़ते खतरे का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि बीमारी के कारणों को समझने के लिए मेडिकल परिस्थितियों के साथ संबंधित परिस्थितिजन्य तथ्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए था।
इसके अलावा कर्मचारियों की ओर से व्यक्त किए गए भय और दबाव से संबंधित मौखिक बयानों को भी जांच में दर्ज करने की मांग की गई है।
अब डीएमई कार्यालय के फैसले पर नजर
इन आरोपों और निष्पक्ष जांच की मांग के बाद अब निगाहें डीएमई कार्यालय पर हैं कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है। हालांकि पत्र में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के पक्ष की ओर से हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




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