धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य विजिलेंस ने भाजपा नेता एवं विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दायरे में वर्ष 2013 से 2023 के दौरान अर्जित उनकी चल-अचल संपत्तियां, बैंक खाते, निवेश और आय के स्रोत शामिल रहेंगे। विजिलेंस इस अवधि में अर्जित संपत्तियों का उनके ज्ञात आय स्रोतों से मिलान करेगी।

धर्मशाला थाना में दर्ज एफआईआर के अनुसार मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी), 13(1)(बी) और 13(2) के तहत दर्ज किया गया है। जांच अवधि 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2023 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान अर्जित संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी।

यह मामला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्रह्मदास भाटिया की शिकायत पर दर्ज किया गया है। मामले की जांच निरीक्षक नरेश कुमार को सौंपी गई है। विजिलेंस संबंधित विभागों से रिकॉर्ड जुटाने के साथ-साथ भूमि, भवन, बैंक खातों, निवेश और अन्य परिसंपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने कहा, “तीन बार मेरे घर की पैमाइश हो चुकी है। मेरे घर के दरवाजे हमेशा खुले हैं, जब चाहे आकर जांच कर लें। सब कुछ पब्लिक डोमेन में है।”
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए सुधीर शर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री भाजपा की चार्जशीट से घबरा गए हैं। इसी वजह से वह डिफेंस में आकर सेल्फ गोल कर रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस तरह की कार्रवाई कर रही है।

वहीं, विजिलेंस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच पूरी तरह दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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