आयुर्वेद के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके डॉ. शारदा आयुर्वेदा वर्ष 2013 से प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन देने के मिशन पर कार्य कर रहे हैं। 14 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ संस्थान गठिया (आर्थराइटिस), सोरायसिस, एक्जिमा, फंगल संक्रमण, अस्थमा, एलर्जी, जोड़ों का दर्द, घुटनों का दर्द, कमर दर्द और अन्य कई पुरानी बीमारियों के आयुर्वेदिक उपचार में विशेषज्ञता रखता है। संस्थान का दावा है कि जिन बीमारियों को कई मरीज लाइलाज मान चुके थे, उनमें भी आयुर्वेदिक उपचार के जरिए सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
डॉ. शारदा आयुर्वेदा के अनुसार अब तक दुनिया भर में 15 लाख से अधिक मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। संस्थान का उद्देश्य केवल बीमारी के लक्षणों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसकी मूल वजह का उपचार करना है, ताकि मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सके और वे स्वस्थ एवं बेहतर जीवन जी सकें।
संस्थान का कहना है कि प्राकृतिक और समग्र चिकित्सा पद्धति के माध्यम से हजारों लोगों ने अपनी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से राहत पाई है और आज वे सामान्य व स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसी उद्देश्य के साथ डॉ. शारदा आयुर्वेदा लगातार देश के विभिन्न राज्यों में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है।
वर्तमान में डॉ. शारदा आयुर्वेदा के क्लीनिक हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, शिमला, हमीरपुर, मंडी और ऊना में संचालित हैं। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना, बठिंडा, मुक्तसर और मोहाली, हरियाणा के सिरसा, करनाल और रोहतक, राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर और उदयपुर, जम्मू तथा देहरादून में भी संस्थान अपनी आयुर्वेदिक सेवाएं प्रदान कर रहा है।
संस्थान का दावा है कि गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा अनुशंसित पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में यह उपलब्धि आयुर्वेद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान है। डॉ. शारदा आयुर्वेदा का उद्देश्य आने वाले समय में भी प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक स्वस्थ जीवन का संदेश पहुंचाना है।
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