Kangra: धर्मशाला से शुरू हुआ बड़ा अभियान! राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने लॉन्च किया ‘न्याय प्रबोध’, अब आम लोगों तक पहुंचेगा आसान न्याय

धर्मशाला में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया। भारत सरकार के न्याय विभाग की ओर से राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों तक न्याय और कानूनी जागरूकता को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि न्याय, समानता और विधि का शासन भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सम्मान और न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने का माध्यम भी है। उन्होंने अनुच्छेद 39(क) का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक या अन्य कारणों से कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे, इसके लिए राज्य का दायित्व निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना है।

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राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक आधारित समाधान, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विधिक जागरूकता अभियान इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने ‘दिशा’, ‘टेली-लॉ’, ‘न्याय बंधु’ और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों ने दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए कानूनी सहायता प्राप्त करना आसान बनाया है।

उन्होंने ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि विधिक जागरूकता ही न्याय तक पहुंच का पहला कदम है। उन्होंने अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों से ‘प्रो बोनो प्रतिज्ञा’ अभियान से जुड़कर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने का आह्वान भी किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों संविधान से अपनी शक्ति प्राप्त करती हैं और नागरिकों की सेवा में एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने बताया कि कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी योजनाओं ने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है। इन माध्यमों से लोग विशेषज्ञ अधिवक्ताओं से निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं और इसकी फीस भारत सरकार वहन करती है।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने 1,725 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त या संशोधित किया है और न्याय व्यवस्था को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई भारतीय न्याय संहिता न्याय आधारित सोच को मजबूत करती है और पुरानी दंड व्यवस्था से आगे बढ़ने का प्रयास है।

इस अवसर पर ‘न्याय प्रबोध, अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया तथा टेली-लॉ सेवा के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक भवानी सिंह पठानिया, विधायक सुधीर शर्मा, भारत सरकार के सचिव (न्याय) नीरज वर्मा, संयुक्त सचिव सुरेश कुमार, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक अशोक रतन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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