Vikramaditya Singh का बड़ा बयान: “देश की संप्रभुता से समझौता बर्दाश्त नहीं”, केंद्र की विदेश नीति पर उठाए सवाल

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लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि विकास के नाम पर हम आंखों पर पट्टी नहीं बांध सकते, खासकर तब जब देश के आत्मसम्मान और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर विदेशी ताकतों के साथ समझौते की बात सामने आ रही हो। उन्होंने कहा कि हिमाचल की पवित्र भूमि हमेशा से स्वाभिमान और साहस का प्रतीक रही है। एक जनसेवक और राज्य सरकार के मंत्री के रूप में उनका प्राथमिक कर्तव्य प्रदेश के विकास के लिए हर संभव प्रयास करना है, और इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ सहयोग एक संवैधानिक और प्रशासनिक आवश्यकता भी है।

उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे की मजबूती इसी में है कि केंद्र और राज्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में काम करें। हिमाचल के बुनियादी ढांचे, सड़कों और शहरी विकास के लिए राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विक्रमादित्य सिंह ने यह प्रतिक्रिया रविवार को उस बयान पर दी, जो आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी और भाजपा के पूर्व महासचिव राम माधव ने वाशिंगटन में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया था। मंत्री ने कहा कि इस खुलासे ने न केवल उन्हें बल्कि हर उस भारतीय को झकझोर दिया है जो ‘भारत प्रथम’ की नीति में विश्वास रखता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राम माधव के बयान के अनुसार भारत ने बिना किसी ठोस विरोध के 50 प्रतिशत टैरिफ स्वीकार किया और अमेरिका के दबाव में आकर ईरान और रूस जैसे पुराने सहयोगियों से तेल खरीद कम या बंद करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे केवल कूटनीतिक चूक नहीं बल्कि आर्थिक स्वायत्तता के आत्मसमर्पण जैसा बताया।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश को बताया गया था कि भारत की विदेश नीति अब मजबूत और स्पष्ट है, लेकिन इस तरह के खुलासे उस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश अपने व्यापारिक हितों की रक्षा नहीं कर पाता और भारी टैरिफ स्वीकार करता है, तो यह मजबूती नहीं बल्कि कमजोरी को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ देश का मध्यम वर्ग और गरीब जनता पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ सस्ते तेल के विकल्पों को छोड़ना आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल का बागवान और छोटा व्यापारी भी इस नीति का सीधा असर झेलता है क्योंकि बढ़ती लागत की जड़ें दिल्ली की आर्थिक नीतियों से जुड़ी हैं।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि हिमाचल सरकार विकास के लिए केंद्र के साथ हर स्तर पर सहयोग करेगी, लेकिन राष्ट्रीय हितों की कीमत पर नहीं। उन्होंने कहा कि विकास की राजनीति चाहिए, विनाश की नहीं, लेकिन गलत नीतियों पर सवाल उठाना भी जरूरी है। भारत की संप्रभुता सर्वोपरि है और इसके साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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