Himachal: हिमाचल की नई आबकारी नीति लागू: शराब की कीमतों से लेकर ठेकों की दूरी तक बड़े बदलाव

हिमाचल प्रदेश में राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति लागू कर दी है, जिसमें शराब, बीयर और वाइन की बॉटलिंग, बिक्री और वितरण से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं। विभाग की अधिसूचना के अनुसार यह नई नीति 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो चुकी है।

नई नीति के तहत विदेशी शराब की बॉटलिंग पर लगने वाले शुल्कों को पुनर्गठित किया गया है। राज्य के भीतर खपत के लिए लीज या फ्रैंचाइजी आधार पर बॉटलिंग करने पर प्रति 750 मिलीलीटर इकाई पर 10.50 रुपये शुल्क तय किया गया है, जबकि निर्यात के लिए यह दर 2.50 रुपये रखी गई है। वहीं, अपने ब्रांड की बॉटलिंग करने वाले निर्माताओं को राज्य में खपत पर 6.50 रुपये और निर्यात पर 1.50 रुपये प्रति इकाई शुल्क देना होगा। देसी शराब की बॉटलिंग पर 2 रुपये और निर्यात पर 1 रुपये प्रति इकाई शुल्क निर्धारित किया गया है।

लाइसेंस फीस में भी बदलाव किए गए हैं। होलसेल वेंड (एल-1) के लिए वार्षिक फीस 50 लाख रुपये तय की गई है। होटल लाइसेंस (एल-3, एल-4 और एल-5) में कमरों की संख्या के आधार पर फीस 1.50 लाख से लेकर 9.50 लाख रुपये तक होगी, जबकि फाइव स्टार होटलों के लिए यह फीस 12.50 लाख रुपये रखी गई है। बीयर और माइक्रो-ब्रूअरी लाइसेंस (बी-1) के लिए न्यूनतम 20 लाख रुपये की फीस तय की गई है, साथ ही प्रति 650 मिलीलीटर बोतल पर राज्य में खपत के लिए 2.50 रुपये और निर्यात के लिए 1.50 रुपये शुल्क लगाया जाएगा।

नई नीति में शराब के ठेकों की लोकेशन को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में ठेकों को धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर होना अनिवार्य होगा। वहीं, शिमला के जाखू और संकट मोचन मंदिर, ऊना के चिंतपूर्णी, कांगड़ा के ज्वाला जी और बिलासपुर के नैना देवी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से ठेकों की दूरी कम से कम 600 मीटर तय की गई है।

सुरक्षा और जागरूकता के तहत सभी खुदरा शराब विक्रेताओं को अपने दुकानों में कम से कम 7 दिनों के बैकअप के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा दुकानों पर हिंदी और अंग्रेजी में चेतावनी बोर्ड लगाना होगा, जिसमें स्पष्ट लिखा होगा कि 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को शराब नहीं बेची जाएगी और शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह आदेश वित्तायुक्त (आबकारी) डॉ. यूनुस द्वारा जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।

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