Kangra: 4 साल बाद चक्की पुल का फाइनल सर्वे पूरा, फिर भी नहीं मिली ट्रेनों को हरी झंडी; पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन पर सस्पेंस बरकरार

उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल खंड पर मंगलवार को उच्चाधिकारियों ने फाइनल सर्वे पूरा कर लिया, लेकिन इसके बावजूद अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि इस मार्ग पर रेल सेवाएं कब से बहाल होंगी। नियमों और प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए रेलवे विभाग अंतिम निर्णय लेने से बचता नजर आ रहा है।

कमिश्नर रेल सुरक्षा दिनेश चंद्र देशवाल, जम्मू मंडल के रेल प्रबंधक विवेक कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित चक्की पुल का सुरक्षा निरीक्षण किया। रेलवे सूत्रों के मुताबिक निरीक्षण में पुल और संबंधित संरचनाएं संतोषजनक पाई गईं। हालांकि सीआरएस टीम सीधे तौर पर रेल संचालन बहाल करने का फैसला नहीं ले सकती। अब विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली स्थित रेलवे विभाग और रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी, जहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही ट्रेनों के संचालन को हरी झंडी मिलेगी।

निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में दिनेश चंद्र देशवाल ने कहा कि इंजीनियरों की टीम ने सभी तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चक्की पुल का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि पिछले चार साल से करीब 20 किलोमीटर रेल लाइन बंद पड़ी है और पुल के निरीक्षण से वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। विभाग ने 24 डिब्बों को कालका फिटनेस जांच के लिए भेजा है, जिन्हें क्रमवार पठानकोट और फिर नैरोगेज मार्ग से संचालित किया जाएगा। जब भी इस मार्ग पर ट्रेनों की शुरुआत होगी, पहले चरण में दो जोड़ी ट्रेनें चलाई जाएंगी और बाद में अन्य ट्रेनों को बहाल किया जाएगा। फिलहाल बैजनाथ पपरोला से कांगड़ा और बैजनाथ पपरोला से जोगिंद्रनगर के बीच दो जोड़ी ट्रेनें संचालित हो रही हैं।

इसी बीच गुलेर रेलवे स्टेशन पर एडवोकेट शिवेंद्र सैनी की अध्यक्षता में स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। गुलेर व्यापार मंडल और पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की कि अंतिम सर्वेक्षण कार्य जल्द पूरा कर रेल सेवा बहाल की जाए। नगरोटा सूरियां में भी लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान के प्रतिनिधि पी.सी. विश्ववकर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों और नंदपुर विकास संघर्ष समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से मुलाकात कर रेल यातायात से जुड़ी समस्याएं और सुझाव सौंपे।

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भारी बरसात के कारण चक्की पुल के दो पिलर बह गए थे, जिससे यह रेल मार्ग बंद हो गया था। चार साल के लंबे इंतजार के बाद पुल के पिलरों का पुनर्निर्माण किया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस बार पिलरों की नींव पहले से ज्यादा गहरी और मजबूत बनाई गई है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

हालांकि यात्रियों की चिंता अभी भी बरकरार है। बरसात का मौसम फिर नजदीक है और रेलवे विभाग कई बार सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इस मार्ग पर सेवाएं बंद कर चुका है। कांगड़ा और मंडी के यात्रियों के लिए यह रेल मार्ग एक महत्वपूर्ण और लगभग एकमात्र रेल संपर्क साधन है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि ट्रेनें आखिर कब चलेंगी और क्या इस बार संचालन लंबे समय तक जारी रह पाएगा।

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