Himachal: महाशिवरात्रि मेले से 12 अजगर ले गई पंजाब की संस्था, बिना अनुमति कार्रवाई पर वन विभाग सख्त, जांच शुरू

महाशिवरात्रि मेले के दौरान शिवबाड़ी में हुई एक घटना ने वन विभाग को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। मेले में आए सपेरों से करीब 12 अजगर लेकर पंजाब ले जाने वाली एक संस्था अब जांच के घेरे में है। आरोप है कि संस्था के सदस्यों ने बिना वन विभाग या पुलिस को सूचित किए अजगरों को अपने साथ ले जाने की कार्रवाई की। इस मामले को वन मंडल अधिकारी ने गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश दे दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवबाड़ी में आयोजित मेले में बाहर से आए सपेरे अपने साथ अजगर और सांप लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान होशियारपुर की एक संस्था के सदस्य वहां पहुंचे और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का हवाला देते हुए सपेरों से करीब 12 अजगर अपने कब्जे में ले लिए। संस्था के सदस्यों ने दावा किया कि वे इन अजगरों को सुरक्षित जंगल में छोड़ने के लिए ले जा रहे हैं। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान न तो स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया और न ही वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली। वन मंडल अधिकारी सुशील राणा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून की मदद कर सकता है, लेकिन कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता। यदि संस्था को किसी के पास वन्य जीव अवैध रूप से रखे होने की जानकारी थी, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से असली दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करने का मौका भी चूक गया।

मामले की जांच का जिम्मा रेंज ऑफिसर राहुल ठाकुर को सौंपा गया है, जिन्होंने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि संबंधित संस्था ने पंजाब के वाइल्ड लाइफ विंग से संपर्क किया था। इस संबंध में लिखित जानकारी मंगवाई गई है और अब संस्था के सदस्यों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

इस बीच पंजाब वाइल्ड लाइफ विंग ने भी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि वन्य जीवों के रेस्क्यू, हैंडलिंग और स्थानांतरण जैसे कार्य संबंधित राज्य के वन विभाग की पूर्व अनुमति और अधिकृत निगरानी में ही किए जा सकते हैं। होशियारपुर की संस्था को जारी चेतावनी पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में किसी भी वन्य जीव मामले में स्वतंत्र रूप से हस्तक्षेप न किया जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित वन विभाग से अनुमति ली जाए। इस पूरे घटनाक्रम की अनुपालन रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश वन विभाग को भी भेज दी गई है, जिससे मामला अब औपचारिक विभागीय जांच के दायरे में आ गया है।

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