जहां आज की तेज़ रफ्तार वाली जिंदगी में कई बुजुर्ग अपने बच्चों से उपेक्षा का दर्द झेलते हैं, वहीं गगरेट उपमंडल के गांव लुहारली के कुलजस राय ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। कुलजस राय ने अपने 98 वर्षीय पिता गुरदास राम को पीठ पर उठाकर बाबा बालक नाथ की तपोस्थली शाहतलाई में दर्शन करवाए।
गुरदास राम उम्र के इस पड़ाव पर चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनके बेटे ने वर्षों पुरानी उनकी इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया। कठिन रास्तों और भीड़भाड़ के बीच कुलजस राय ने अपने पिता को पीठ पर उठाए रखा और पूरे श्रद्धा भाव से बाबा बालक नाथ के चरणों में शीश नवाया। यह भावुक दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा बन गया।
कुलजस राय के भाई गुलशन राय ने बताया कि उनके पिता लंबे समय से बाबा बालक नाथ के दर्शन करने की इच्छा रखते थे। उम्र और स्वास्थ्य बाधक थे, लेकिन परिवार ने मिलकर यह तय किया कि पिता की इच्छा हर हाल में पूरी की जाएगी।
कुलजस राय का यह कृत्य आज के समाज के लिए संदेश है कि माता-पिता की सेवा से बड़ा धर्म कोई नहीं। यह घटना न केवल बेटे के प्रेम और कर्तव्य का उदाहरण है, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए भी सीख है कि अपने वृद्ध माता-पिता का सम्मान करना, उनकी इच्छाओं को समझना और उन्हें पूरा करने का प्रयास करना हमारा नैतिक दायित्व है।
श्रद्धालुओं ने कुलजस राय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे सच्ची श्रद्धा और संस्कारों का प्रतीक बताया। यह घटना साबित करती है कि जब संकल्प मजबूत हो और दिल में माता-पिता के लिए सच्चा प्रेम हो, तो उम्र और परिस्थितियां भी कोई बाधा नहीं बन सकतीं।
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