Mandi: सराज में महिलाओं ने रच डाली मिसाल: सरकार का इंतजार नहीं किया, खुद बनाया पुल!

Date:

--Advertisement--

मंडी के सराज में आफत के बीच उम्मीद की मिसाल: जुड़ गांव की महिलाओं ने खुद बनाया रास्ता

मंडी जिला के सराज विधानसभा क्षेत्र में 30 जून को आई भीषण आपदा के बाद तबाही का मंजर चारों तरफ था। करीब 30 पुल टूट गए और दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया। ऐसे हालात में जहां लोग सरकार और प्रशासन की तरफ राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं जुड़ गांव के ग्रामीणों और खासकर गांव की महिलाओं ने हिम्मत और एकजुटता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सबका दिल जीत लिया।

ग्राम पंचायत झुंडी के जुड़ गांव में, गांव के पुरुषों के साथ महिलाओं ने मिलकर रोपड़ी खड्ड पर आर-पार जाने के लिए एक अस्थायी रास्ता तैयार कर लिया। इस रास्ते से अब जुड़ गांव के अलावा रोपा, निलमपुर और जाजर जैसे गांवों की लगभग 600 लोगों की आबादी को राहत मिलेगी, जो अब तक पूरी तरह से कटे हुए थे।

सरकार से पहले जनता ने बना डाला रास्ता

आपदा की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रोड, मझाखल, खुनागी, सुराह, शिल्हीबागी, ब्रयोगी और चिउणी जैसे इलाकों में भी लोग खुद ही अस्थायी पुल बना रहे हैं। लेकिन सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर अब तक एक भी स्थायी पुल नहीं बनाया गया है। ऐसे में जुड़ गांव के लोगों ने हालात से हार मानने की बजाय खुद कमान संभाली।

महिलाएं बनीं नेतृत्व की मिसाल

इस बार जो सबसे बड़ी बात सामने आई, वह थी महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी। गांव की चुड़ी देवी, बिमला देवी, माला देवी, हंसा देवी, गंगा देवी, लीला देवी, धर्मी देवी और अन्य महिलाओं ने सिर्फ सामग्री ढोने में ही नहीं, बल्कि रस्सियां बांधने, पुल की नींव रखने और घंटों मेहनत करने में भी पूरी ताकत झोंक दी।

यह महिला शक्ति और आत्मसम्मान का ऐसा उदाहरण है, जो सराज की धरती पर लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

“अगर हम नहीं करते तो कौन करता”

जुड़ गांव की महिलाओं का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजना था और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना जरूरी था। ऐसे में इंतजार करने का सवाल ही नहीं था। उनका कहना था: अगर हम नहीं करते तो कौन करता?” – यही सोच उन्हें आगे बढ़ाती रही।

एकता, हौसला और आत्मनिर्भरता की जीत

सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम भले न उठाया गया हो, लेकिन सराज के जुड़ गांव और अन्य क्षेत्रों के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि जब एकता हो, हौसला हो और महिलाएं आगे आएं, तो कोई भी मुश्किल नामुमकिन नहीं रहती।

यह सिर्फ एक अस्थायी पुल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामुदायिक भावना का जीता-जागता उदाहरण है — जो पूरे हिमाचल और देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।

यह कहानी बताती है कि असली बदलाव तब आता है, जब लोग खुद बदलाव बनने का फैसला करते हैं।

For advertisements inquiries on HIM Live TV, Kindly contact us!

Connect with us on Facebook and WhatsApp for the latest updates!

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

spot_img

Popular

More like this
Related

शिमला में नौकरी का मौका, कुक हेल्पर और स्टीवर्ड के पदों पर 24 सितंबर को कैंपस इंटरव्यू; 13 हजार तक वेतन के साथ भोजन-आवास

शिमला में कुक हेल्पर और स्टीवर्ड के पदों पर नौकरी का मौका है। 24 सितंबर को नालदेहरा में कैंपस इंटरव्यू होगा। 20 से 45 वर्ष के पुरुष उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। कुक हेल्पर को 13,000 और स्टीवर्ड को 12,000 रुपये मासिक वेतन के साथ भोजन और आवास की सुविधा मिलेगी।

सुंदरनगर पुलिस ने तकनीक से ढूंढ निकाले चोरी-गुम हुए 10 मोबाइल, CEIR पोर्टल बना बड़ा मददगार; अब मालिकों को लौटाए जाएंगे फोन

सुंदरनगर पुलिस ने CEIR पोर्टल और IMEI नंबर की मदद से चोरी और गुम हुए 10 मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए हैं। पुलिस ने अब इन मोबाइल फोन को उनके मूल मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कालाअम्ब में बेकाबू ट्रक ने बाइक सवारों को कुचला, 2 की मौत; हिमाचल से हरियाणा तक मचा हड़कंप, चालक गिरफ्तार

कालाअम्ब में शनिवार रात तेज रफ्तार ट्रक ने गलत दिशा में जाकर बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दो लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रक हिमाचल-हरियाणा सीमा पार कर गया और हरियाणा में भी कई वाहनों व एक दुकान को नुकसान पहुंचाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

कुत्ते का शिकार करने घर में घुसा तेंदुआ खुद कमरे में हुआ कैद, 36 घंटे तक मचा हड़कंप; ट्रेंकुलाइजर से हुआ सुरक्षित रेस्क्यू

सिरमौर के चूईनाधार गांव में कुत्ते का शिकार करने घर में घुसा तेंदुआ खुद ही कमरे में कैद हो गया। करीब 36 घंटे बाद वन विभाग की टीम ने ट्रेंकुलाइजर और प्रशिक्षित निशानेबाज की मदद से उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया और जंगल में छोड़ दिया।