Kangra: पालमपुर का जर्जर वाटर टैंक बना खतरा, पुस्तकालय व आवासीय क्षेत्र पर मंडराया बड़ा संकट

पालमपुर के गांधी मैदान में स्थित एक पुराना कंक्रीट वाटर टैंक अब भारी खतरे का कारण बनता जा रहा है। करीब दो दशक पहले लाखों रुपये की लागत से बनाए गए इस टैंक की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यह मिट्टी में तब्दील हो गया है। दिसंबर माह में जब जल शक्ति विभाग ने इस अधूरे टैंक के निर्माण कार्य को फिर से शुरू करने के लिए ठेकेदार को कार्य सौंपा, तो जांच के दौरान सामने आया कि टैंक की कंक्रीट पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। जैसे ही ठेकेदार ने कंक्रीट पर हथौड़ा मारा, वह टूटकर गिरने लगी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई और निरीक्षण में टैंक को पूरी तरह से ‘अनसेफ’ घोषित कर दिया गया। कार्य को तुरंत रोक दिया गया और ठेकेदार ने शटरिंग भी हटा दी।

करीब 25 मीटर ऊंचा यह टैंक आज भी वहीं खड़ा है, जबकि इसकी हालत बेहद खस्ताहाल है। यह टैंक नगर निगम के पुस्तकालय और वाचनालय के ऊपर स्थित है, जहां सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं। यदि कभी यह टैंक गिरता है, तो यह पुस्तकालय में आने वाले विद्यार्थियों और अन्य लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। टैंक के नीचे सार्वजनिक शौचालय भी है, वहीं आसपास दुकानें और एक आवासीय परिसर भी मौजूद है। हाल ही में इसी क्षेत्र में एक इमारत का छज्जा बारिश के कारण नीचे गिर गया था, जिससे लोगों में डर और अधिक बढ़ गया है।

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यह वाटर टैंक आज से लगभग बीस साल पहले गांधी मैदान के एक कोने में बनाया गया था। करीब 2 लाख लीटर क्षमता वाले इस टैंक का आधा निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था, लेकिन बाद में मामला न्यायालय में पहुंच गया। लोगों ने यह कहते हुए याचिका दायर की थी कि इतनी बड़ी क्षमता का टैंक आबादी वाले क्षेत्र में बनाना सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था। उसके बाद वर्षों तक यह मामला रुका रहा और अब जाकर विभाग ने कार्य शुरू किया, परंतु टैंक की हालत ने सबको चौंका दिया।

स्थानीय लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इतने लंबे समय से यह जर्जर ढांचा बिना किसी सुरक्षा उपाय के उसी हालत में खड़ा है। न इसे गिराया गया और न ही मरम्मत की कोई योजना सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना कभी भी गिर सकती है, जिससे बड़ी जनहानि हो सकती है। इसलिए लोगों की मांग है कि या तो इसे तुरंत गिराया जाए या फिर विशेषज्ञों से जांच करवाकर सुरक्षित रूप से पुनर्निर्माण किया जाए। फिलहाल, यह टैंक आम जनता के लिए खतरे का प्रतीक बना हुआ है और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है।

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