Himachal: न्यूजीलैंड से एफटीए बना हिमाचल के बागवानों की मुसीबत, सेब पर घटा आयात शुल्क बढ़ाएगा संकट

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न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने का असर अब हिमाचल प्रदेश के बागवानों पर साफ दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार ने न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया है, जबकि कीवी और नाशपाती पर आयात शुल्क घटाकर करीब साढ़े 16 प्रतिशत कर दिया गया है। बागवानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी कमर टूट जाएगी और पहले से संकट में चल रहे सेब उद्योग पर बड़ा झटका लगेगा।

हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को भी विदेशी सेब से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। लगातार बढ़ती उत्पादन लागत और घटते बाजार भाव से बागवान पहले ही परेशान हैं। ऐसे में आयात शुल्क घटने से विदेशी सेब सस्ता होगा और घरेलू सेब को नुकसान उठाना पड़ेगा।

न्यूजीलैंड से जून से अगस्त के बीच सेब का आयात होता है। यही समय हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब तुड़ान का होता है। राज्य में अधिकांश सेब उत्पादन इन्हीं क्षेत्रों में होता है। ऐसे में इन इलाकों के बागवानों पर न्यूजीलैंड के सेब का सीधा असर पड़ेगा। बताया जा रहा है कि न्यूजीलैंड से आयात होने वाला सेब भारतीय बाजार में करीब 1.25 डॉलर यानी लगभग 112 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकेगा। हालांकि कीमत ज्यादा है, लेकिन गुणवत्ता के मामले में यह सेब हिमाचल के निचले और मध्यम क्षेत्रों के सेब से आगे माना जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं। कीवी और नाशपाती उत्पादकों को भी इस फैसले से नुकसान की आशंका है।

स्टोन फ्रूट उत्पादक संघ के अध्यक्ष दीपक सिंघा ने कहा कि अभी यह कहानी न्यूजीलैंड से शुरू हुई है, लेकिन आने वाले समय में यह अन्य देशों तक पहुंचेगी। उन्होंने आशंका जताई कि अब अमेरिका और ईरान जैसे देश भी अपने सेब पर आयात शुल्क घटाने की मांग करेंगे। यदि ऐसा हुआ तो हिमाचल समेत अन्य सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों को भारी नुकसान होगा और हालात सड़कों पर उतरने जैसे बन सकते हैं।

संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने विदेशी सेब के लिए एक रास्ता खोल दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के साथ भी इसी तरह के समझौते की चर्चा चल रही है और अन्य देश भी इसी तर्ज पर दबाव बनाएंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार आयात शुल्क को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करे और न्यूनतम आयात मूल्य यानी एमआईपी लागू करे, ताकि बागवानों को राहत मिल सके।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सेब उद्योग की कमर टूट जाएगी और सरकार को इस पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बागवान पहले से ही जिस आशंका को जता रहे थे, वह अब सच साबित हो रही है। न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटने से हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे सेब उत्पादक राज्यों को सीधा नुकसान होगा।

रोहित ठाकुर ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश से भाजपा के सात सांसद हैं और केंद्र में राज्य से जगत प्रकाश नड्डा मंत्री हैं। हिमाचल की जनता ने सभी भाजपा सांसदों को जिताया है, ऐसे में इन सभी को बागवानों का मुद्दा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के सामने मजबूती से उठाना चाहिए, ताकि इस फैसले पर दोबारा विचार हो सके।

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