लाहल क्षेत्र में भालुओं की बढ़ती गतिविधियों से लोगों में डर और आक्रोश के बीच वन विभाग हरकत में आ गया है। सांकेतिक चक्का जाम के तुरंत बाद वन विभाग ने भालुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में एक पिंजरा खलेली गांव में स्थापित किया गया है। वन परिक्षेत्र अधिकारी जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में विभाग की टीम ने गरीमा से लेकर वाहलो, लमनौता, डंडारड़ा, दापोता, खनी और खलेली होते हुए लाहल स्थित पेट्रोल पंप तक रैकी की। इस दौरान टीम को भालुओं के क्षेत्र में आने-जाने के कई संकेत भी मिले हैं।
बीते दिन वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया था कि जंगली भालुओं की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इसी आश्वासन के तहत फिलहाल पिंजरे लगाने का काम शुरू किया गया है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगली जानवरों को रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए सामूहिक प्रयास करें। इसके लिए पटाखे फोड़ने, शोर मचाने और आग जलाने जैसे उपाय अपनाकर भालुओं को आबादी से दूर भगाया जा सकता है।
हालांकि खणी और गरीमा पंचायतों के लोगों में अब भी रोष बना हुआ है। उनका कहना है कि भालू को पिंजरे में कैद करना बेहद कठिन काम है और विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे को वे केवल औपचारिकता मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह तय नहीं किया जा सकता कि भालू उसी जगह आएगा, जहां पिंजरा लगाया गया है। उन्होंने कहा कि भालुओं को पकड़ना आसान नहीं है और अब देखना होगा कि वन विभाग का यह प्रयास कितना सफल साबित होता है।
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