हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEB) में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और कर्मचारियों की मौत को लेकर कर्मचारी यूनियन और पेंशनर्स फोरम ने गंभीर चिंता जताई है। विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नितिश भारद्वाज, महासचिव प्रशांत शर्मा, पैटर्न कामेश्वर शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष कुलदीप कुमार और विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर इन हादसों की जिम्मेदारी कौन लेगा।
यूनियन नेताओं का कहना है कि पिछले दिनों प्रदेश में आई आंधी-तूफान के कारण कई बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं, जिसके बाद बिजली बहाली का पूरा दबाव सीमित कर्मचारियों पर डाल दिया गया। कर्मचारियों की भारी कमी के चलते वे लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
हाल ही में पालमपुर डिवीजन के बिंद्रावन क्षेत्र में एक बड़ा हादसा हुआ, जिसमें पोल पर काम कर रहा एक लाइनमैन करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। यूनियन ने सवाल उठाया है कि कर्मचारी अचानक करंट की चपेट में कैसे आया, लाइन किसने चालू की और इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा। यूनियन का आरोप है कि ऐसे मामलों की न तो निष्पक्ष जांच होती है और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई की जाती है।
यूनियन नेताओं ने इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे संबंधित अधिकारियों के कार्यालय का घेराव करेंगे।
यूनियन ने यह भी गंभीर मुद्दा उठाया है कि प्रदेश में तकनीकी कर्मचारियों के लगभग 6500 पद खाली पड़े हैं। वर्ष 2021 के बाद से कोई भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में आउटसोर्स के माध्यम से ठेकेदारों द्वारा केवल छह घंटे के लिए ‘बिजली मित्र’ की भर्ती की जा रही है, जिसे यूनियन ने पूरी तरह से असंगत और असुरक्षित बताया है।
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