Himachal: हिमाचल में आपदा के बाद बहती लकड़ियों पर बड़ा सवाल, कुलदीप राठौर ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में आई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने जहां कई लोगों की जान ले ली, वहीं बाढ़ के साथ बहकर आई हजारों टन लकड़ी ने एक नई चिंता खड़ी कर दी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और शिमला ग्रामीण से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई गहरी गड़बड़ी है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।

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राठौर ने बताया कि वर्ष 2023 में जब प्रदेश में आपदा आई थी, उस समय भी थुनाग क्षेत्र में इसी तरह की स्थिति सामने आई थी। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि प्रदेश के जंगलों में अवैध कटान और खनन हो रहा है, जिससे पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही का परिणाम भी है, जिसके लिए जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हाल की आपदा में 6 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अभी भी लापता हैं। हालांकि सरकार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है, लेकिन जिस तरह से नदियों और नालों में बड़ी मात्रा में लकड़ियां बहकर आई हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के जंगलों में अवैध गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहा है और मुख्यमंत्री को इस पर तुरंत सख्त निर्देश देने चाहिए।

राठौर ने यह भी कहा कि जहां-जहां हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं, वहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है। इसके अलावा, नदी-नालों के किनारे अतिक्रमण कर अवैध निर्माण हो रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश सरकार को अब एक ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी आपदाओं के दौरान जान-माल का नुकसान रोका जा सके।

राजनीतिक स्तर पर भी राठौर ने भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेता पूरे देश में आपातकाल का रोना रो रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले यह देखना चाहिए कि क्या आज वास्तव में देश में लोकतंत्र और संविधान सुरक्षित हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और अगर कोई प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलता है, तो उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिए जाते हैं।

कुलदीप राठौर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में एक तरफ से भ्रष्ट नेता डाले जाते हैं और दूसरी तरफ से वे साफ-सुथरे होकर निकलते हैं। उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं और न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं।

राठौर ने अंत में कहा कि भाजपा यह कहती है कि 2014 के बाद देश में बोलने की आजादी मिली, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि क्या अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय लोगों को बोलने की आजादी नहीं थी? उन्होंने आरोप लगाया कि अब देश में इस तरह की तस्वीर पेश की जा रही है मानो देश का इतिहास ही 2014 के बाद शुरू हुआ हो।

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