हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में फर्जी शैक्षणिक और तकनीकी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। विजिलेंस ने इस मामले में पूर्व कनिष्ठ अभियंता (JE) समेत तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में तीनों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। जांच के दौरान कर्नाटक, राजस्थान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) ने संबंधित व्यक्तियों के नाम पर प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार कर दिया है। आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस थाना चंबा में मामला दर्ज किया गया है।

विजिलेंस की जांच के अनुसार, खणी निवासी अनिल कुमार वर्ष 2022 में बिजली बोर्ड के होली उपमंडल में कनिष्ठ अभियंता के पद पर नियुक्त हुए थे। आरोप है कि नौकरी हासिल करने के लिए उन्होंने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा प्रस्तुत किया था। जब इस प्रमाणपत्र का सत्यापन करवाया गया तो विश्वविद्यालय ने उनके नाम से ऐसा कोई डिप्लोमा जारी करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद उनका प्रमाणपत्र संदेह के घेरे में आ गया।
बोर्ड के कुछ अधिकारी भी जांच के दायरे में
जांच में यह बात भी सामने आई है कि प्रमाणपत्रों के संदिग्ध होने की जानकारी मिलने के बावजूद बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने आपराधिक कार्रवाई के लिए जांच एजेंसी को सूचित नहीं किया। ऐसे अधिकारी भी अब विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं।
प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठने के बाद बिजली बोर्ड प्रबंधन ने विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की थी। इसके तहत अनिल कुमार और विशाल कुमार चौहान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था, जबकि दिवेश कुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया था।

ये है पूरा मामला
चंबा के देहरा गांव निवासी दिवेश कुमार वर्ष 2021 में बिजली बोर्ड के चंबा मंडल में जूनियर टी-मेट के पद पर नियुक्त हुए थे। उन्होंने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल, जयपुर से जारी दसवीं कक्षा का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। सत्यापन के दौरान संस्थान ने उनके नाम से ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार कर दिया।
वहीं, तीसरे मामले में बालू निवासी विशाल कुमार वर्ष 2019 में बिजली बोर्ड के डलहौजी मंडल में जूनियर टी-मेट नियुक्त हुए थे। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS), नोएडा का दसवीं कक्षा का प्रमाणपत्र जमा करवाया था। जांच के दौरान यह प्रमाणपत्र भी अप्रमाणिक पाया गया। अब विजिलेंस तीनों मामलों की जांच कर रही है और बोर्ड के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।


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