Big Political Move: पंचायत चुनावों से कांग्रेस बाहर, सुक्खू के फैसले से मचा सियासी बवाल

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि कांग्रेस पार्टी आगामी पंचायत चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी के सभी विधायकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इन चुनावों में किसी भी स्तर पर भागीदारी न करें। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है और इसके पीछे की वजहों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पंचायत चुनावों को लेकर यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पहले भी इन्हें टालने को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा था। आरक्षण रोस्टर में कथित छेड़छाड़ के मुद्दे पर भी सरकार को न्यायालय की सख्ती का सामना करना पड़ा था। अब कांग्रेस के इस नए कदम के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता के बीच जाने और संभावित हार के डर से चुनावी मैदान से दूरी बना रही है।

भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी विश्व चक्षु ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हार के डर से लिया गया निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की बुनियाद होती हैं और यहीं से जनता के रुझान का पता चलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नींव के स्तर पर ही भागेंगे तो बड़ी राजनीति कैसे टिकेगी। उनका आरोप है कि कांग्रेस को पहले ही अपनी हार का अंदेशा हो गया है, इसलिए वह बिना चुनाव लड़े ही पीछे हट रही है।

कांग्रेस के इस फैसले ने प्रदेश के सियासी माहौल को और गरमा दिया है। राजनीतिक जानकार अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह रणनीति आगे विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिलेगी या यह फैसला सिर्फ पंचायत चुनावों तक ही सीमित रहेगा। फिलहाल, कांग्रेस के इस कदम ने जहां नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, वहीं विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का एक बड़ा मौका भी दे दिया है। आने वाले समय में इस फैसले का हिमाचल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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