Hamirpur: स्मार्ट मीटर और बिजली संशोधन विधेयक पर भड़के कर्मचारी और उपभोक्ता, गगल में जोरदार प्रदर्शन

प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 और स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में विद्युत बोर्ड कर्मचारियों, इंजीनियर्स, पेंशनर्स और उपभोक्ताओं ने संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर गगल कॉम्प्लेक्स स्थित विद्युत मंडल कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। भोजनावकाश के दौरान हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।

इस मौके पर विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के वरिष्ठ प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि निजी कंपनियां अपना खुद का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बजाय विद्युत बोर्ड लिमिटेड के पहले से बने ढांचे का इस्तेमाल करके बिजली आपूर्ति करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए निजी कंपनियों को ग्रिड सब-स्टेशनों से लेकर उपभोक्ताओं के घरों तक स्मार्ट मीटर की आवश्यकता होगी, ताकि बिजली की खरीद और बिक्री का पूरा डेटा उनके डेटा सेंटर तक पहुंच सके और वे अपना हिसाब-किताब रख सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर आम उपभोक्ताओं की जरूरत नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट घरानों के व्यवसाय को चलाने के लिए जरूरी हैं। लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से लगाए जा रहे इन स्मार्ट मीटरों का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। इसके अलावा, रियल टाइम डेटा ट्रांसमिशन के कारण बिजली की दरें लोड के अनुसार तय होंगी, जिससे दिन में कम और रात में अधिक टैरिफ लग सकता है।

कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा 125 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिससे करीब साढ़े 12 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य आता है। ऐसे में 10 हजार रुपये की लागत वाला स्मार्ट मीटर लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड या स्मार्ट मीटर जबरन नहीं लगाया जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की।

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