Shimla: डॉक्टरों और पीजी छात्रों को बड़ी सौगात, सीएम सुक्खू ने IGMc में इंसेंटिव पॉलिसी और करोड़ों की घोषणाओं से चौंकाया

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला स्थित आईजीएमसी सभागार में केंद्रीय छात्र संघ द्वारा आयोजित वार्षिक समारोह “स्टीमुल्स” की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टरों के लिए नई इंसेंटिव पॉलिसी लाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह इंसेंटिव पॉलिसी विभिन्न मानकों के आधार पर लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आगामी बजट में पीजी रेजिडेंट छात्रों की मासिक राशि बढ़ाई जाएगी, जिसमें प्रथम वर्ष में 50 हजार, द्वितीय वर्ष में 60 हजार और तृतीय वर्ष में 65 हजार रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान होगा।

मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी के छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के विद्यार्थी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन सेवाएं देने वाले छात्रों और डॉक्टरों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर ने मुख्यमंत्री को कॉलेज की गतिविधियों, उपलब्ध सुविधाओं और आवश्यकताओं की जानकारी दी। केंद्रीय छात्र संघ के मुख्य सलाहकार डॉ. पुनीत महाजन ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया, जबकि फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर पीयूष कपिला ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने आईजीएमसी में लैप्रोस्कोपिक सुविधाओं के लिए 5 करोड़ रुपए और एनेस्थीसिया विभाग के लिए 6 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसके अलावा आईजीएमसी के छात्रावास निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने केएनएच से स्त्री रोग विभाग को आईजीएमसी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी, चमीआणा स्थित एम्स, टांडा, नेरचौक और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रत्येक को 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक से लैस किया जाएगा। उन्होंने केंद्रीय छात्र संघ को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए 5 लाख रुपए देने की भी घोषणा की। इसके साथ ही चमीआणा संस्थान, आईजीएमसी और टीएमसी में स्मार्ट लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। राज्य सरकार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और अधोसंरचना के विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करने जा रही है। पिछले तीन वर्षों में मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे और आधुनिक उपकरणों पर 1,207 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

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