चंबा जिले की चुराह घाटी के तीसा क्षेत्र में एसआईयू टीम द्वारा पकड़ी गई 1.420 किलोग्राम चरस की खेप का मामला हर दिन नया मोड़ ले रहा है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नशा तस्करी के इस नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। अब इस मामले में एक और व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस ने दबिश और तेज कर दी है।
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस पहले ही एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है, जो इस समय पुलिस रिमांड पर है। रिमांड के दौरान की गई पूछताछ और एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर अब नरेश कुमार नामक व्यक्ति की इस तस्करी में सीधी भूमिका सामने आई है। जैसे ही पुलिस ने नरेश कुमार की घेराबंदी शुरू की, वह मौके से फरार हो गया। इसके बाद से पुलिस की विशेष टीमें उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि कार्रवाई के बीच आरोपी का अचानक फरार होना उसके खिलाफ शक को और मजबूत करता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी ने उसे समय रहते कार्रवाई की जानकारी दी और फरार होने में मदद की। साथ ही पुलिस यह जानने में जुटी है कि 1.420 किलोग्राम चरस की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। अधिकारियों का कहना है कि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी से इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि नशे के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मामले की पुष्टि करते हुए एसपी विजय कुमार सकलानी ने बताया कि जांच लगातार जारी है और हर कड़ी को गंभीरता से खंगाला जा रहा है।
उधर, चरस बरामदगी के दौरान एसआईयू टीम पर हुए हमले के मामले में भी पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब तक 17 अज्ञात हमलावरों की पहचान की जा चुकी है। एसडीपीओ सलूणी रंजन शर्मा की निगरानी में गठित विशेष टीम वैज्ञानिक साक्ष्यों और वीडियो फुटेज के आधार पर एक-एक आरोपी की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि यह हमला अचानक हुआ था या फिर पुलिस कार्रवाई को रोकने के लिए इसे पहले से सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।
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