Himachal: ठंड में भी नहीं डिगे दृष्टिबाधित, सचिवालय के बाहर चक्का जाम से हिली सरकार

अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को दृष्टिहीन जन संगठन ने शिमला में सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कड़ाके की ठंड के बावजूद दृष्टिबाधित जनसंगठन के सदस्य धरने पर डटे रहे। लंबे समय से मांगें लंबित रहने और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज संगठन के सदस्य सुबह करीब 10 बजे सचिवालय के बाहर एकत्र हुए। इस प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए दृष्टिबाधित लोग शामिल हुए, जिनके साथ उनके परिजन भी मौजूद रहे।

चक्का जाम के चलते छोटा शिमला सड़क मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर लंबा जाम लग गया और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। दृष्टिबाधित जनसंगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगें कई वर्षों से सरकार के पास लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि प्रदर्शन के दौरान उन्हें 7 जनवरी को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ वार्ता का आश्वासन दिया गया है। संगठन ने साफ किया है कि इस बैठक के बाद ही आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

दृष्टिबाधित जनसंगठन के सदस्य राजेश ठाकुर ने बताया कि सचिवालय के बाहर रोजाना पांच दिव्यांग सदस्य धरने पर बैठ रहे हैं और भीषण ठंड के बावजूद उनका आंदोलन लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि कालीबाड़ी मंदिर के पास चल रहे धरने को 804 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

राजेश ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1995 से दिव्यांगों के लिए आरक्षित चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग पद आज तक नहीं भरे गए हैं। दिव्यांग कोटे के तहत शिक्षा, वन, लोक निर्माण और जलशक्ति विभागों में इन पदों को भरा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने दिव्यांग पेंशन को मौजूदा 1,700 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग दोहराई। उन्होंने सरकार पर सहारा योजना और बस पास सुविधा समाप्त करने का आरोप भी लगाया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओकओवर का घेराव किया जाएगा।

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