आरबीआई की कार्रवाई के करीब दो महीने बाद बघाट बैंक सोलन ने अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी करने में सफलता हासिल की है। बैंक ने ऋण डिफॉल्टरों की संपत्तियां बेचकर यह रिकवरी की है। शुक्रवार को बैंक ने चार प्रॉपर्टी को ई-ऑक्शन के जरिए 4.14 करोड़ रुपये में नीलाम किया, जबकि इनकी आरक्षित कीमत करीब 3.80 करोड़ रुपये रखी गई थी। इस तरह बैंक को करीब 34 लाख रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।
हालांकि, इस बार भी 9 प्रॉपर्टी के लिए कोई खरीदार नहीं मिला। इन संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया अब नए सिरे से शुरू की जाएगी। ई-ऑक्शन में सफल रहे खरीदारों ने 10 प्रतिशत राशि जमा कर दी है, जबकि शेष रकम 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। पूरी राशि जमा होते ही बैंक का एनपीए 123 करोड़ रुपये से घटकर 119 करोड़ रुपये रह जाएगा।
नीलामी में सबसे महंगी प्रॉपर्टी बद्दी में बिकी। 1.19 बीघा का यह प्लॉट 2.09 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ, जबकि बैंक ने इसकी कीमत करीब 1.78 करोड़ रुपये तय की थी। बोली के दौरान खरीदारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे बैंक को इस संपत्ति से करीब 31 लाख रुपये की अतिरिक्त रकम मिली। इसके अलावा हरठ की दो प्रॉपर्टी भी नीलाम की गईं, जो कुल मिलाकर करीब 8 बीघा जमीन थीं। इनमें से एक जमीन करीब 1 करोड़ रुपये में बिकी, जबकि इसकी कीमत 97.72 लाख रुपये रखी गई थी। दूसरी जमीन 32.52 लाख रुपये में नीलाम हुई। वहीं, जटोली मंदिर के पास स्थित एक पांच मंजिला भवन भी करीब 71.51 लाख रुपये में बिक गया।
बैंक के पास अभी भी 24 ऐसी प्रॉपर्टी हैं, जिनकी आने वाले दिनों में नीलामी होनी है। इससे पहले 13 नवंबर को 26 प्रॉपर्टी की नीलामी रखी गई थी, लेकिन उस समय कोई खरीदार सामने नहीं आया था। इस बार बैंक ने 13 प्रॉपर्टी को नीलामी में रखा था, जिनमें से 4 बिक सकीं। इससे बैंक प्रबंधन के हौसले भी कुछ हद तक मजबूत हुए हैं। बैंक ने करीब 130 मामलों की फाइलें चार जिलों के तहसीलदारों को अटैचमेंट के लिए भेजी हैं, जिनमें से कुछ संपत्तियां अटैच भी हो चुकी हैं और इन्हें भी जल्द नीलामी के लिए रखा जाएगा। बघाट बैंक के प्रबंध निदेशक राजकुमार ने नीलामी की पुष्टि करते हुए बताया कि खरीदारों को 15 दिनों के भीतर पूरी राशि जमा करनी होगी।
एजीएम पर बनी सहमति
शुक्रवार को बघाट बैंक के निदेशक मंडल और शेयर होल्डर्स की बैठक भी हुई। बैंक अध्यक्ष अरुण शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शेयर होल्डर फोरम ने मौजूदा हालात को देखते हुए जल्द एजीएम बुलाने की मांग की। फोरम का कहना था कि बैंक की स्थिति शेयर होल्डर्स के सामने स्पष्ट रखी जानी चाहिए और यदि किसी अन्य बैंक में विलय का फैसला लेना हो तो वह भी एजीएम में ही हो। फोरम के प्रधान इंजीनियर सोम प्रकाश गुप्ता की ओर से यह प्रस्ताव रखा गया, जिसे निदेशक मंडल ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद एजीएम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शेयर होल्डर्स का कहना था कि रिकवरी प्रक्रिया अपनी जगह जारी रहेगी, लेकिन बैंक को बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है।
18 दिसंबर के धरने पर सस्पेंस
बघाट बैंक के मुख्य कार्यालय के बाहर 18 दिसंबर को प्रस्तावित सांकेतिक धरने को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद कल्याण संघ के बैनर तले खाताधारकों और शेयर होल्डर्स ने धरने का ऐलान किया था, लेकिन शुक्रवार की बैठक के बाद शेयर होल्डर्स का रुख कुछ नरम पड़ा है। निदेशक मंडल ने धरना स्थगित करने का आग्रह किया था। शेयर होल्डर फोरम के अध्यक्ष इंजीनियर सोम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि धरने को लेकर गठित कमेटी की अभी बैठक नहीं हुई है। बोर्ड के समक्ष रखी गई मांगों को मान लिया गया है और अगली बैठक के बाद ही धरने को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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