Himachal: देवभूमि का ‘मणिमुकुट’ है किन्नौर, संस्कृति बचाने के लिए एकजुट हों युवा: अनुराग ठाकुर

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सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने किन्नौर की समृद्ध संस्कृति और इतिहास की सराहना करते हुए कहा कि अगर हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है तो किन्नौर उसका मणिमुकुट है। उन्होंने कहा कि किन्नौर की संस्कृति, वेशभूषा और परंपराएं न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया में सराही जाती हैं। ठाकुर दिल्ली में दिल्ली-किन्नौर स्टूडैंट्स एसोसिएशन के वार्षिक कार्यक्रम ‘तोशिम’ में मुख्यातिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आपसी समन्वय और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘तोशिम’ कार्यक्रम पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से आयोजित किया जा रहा है। यह अपने आप में किन्नौर की सांस्कृतिक चेतना और एकजुटता का प्रतीक है। ठाकुर ने कहा कि किन्नौर सिर्फ सेब उत्पादन के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां भारत की सबसे पुरानी और समृद्ध सभ्यता और संस्कृति भी जीवित है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि हिमाचल का निवासी होना हर व्यक्ति के लिए गर्व की बात है, लेकिन हिमाचली होने के साथ-साथ किन्नौरी होना अपने आप में विशेष पहचान और सम्मान का विषय है। उन्होंने किन्नौर की बोली, साहित्य और लोक परंपराओं को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि दिल्ली-किन्नौर स्टूडैंट्स एसोसिएशन न केवल भाषा और संस्कृति के संरक्षण का कार्य कर रहा है, बल्कि किन्नौर के युवाओं को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को मजबूती देना हम सभी का दायित्व है।

उन्होंने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश के 75 गांवों को वाइब्रैंट विलेज प्रोग्राम में शामिल किया गया है, जिनमें से 55 गांव किन्नौर के हैं। इस योजना के तहत नाको और लिओ जैसे गांवों में पर्यटन ढांचे को विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। ठाकुर ने कहा कि किन्नौर का ओरल लिटरेचर और फोक लिटरेचर बेहद समृद्ध है और इस दिशा में गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

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