Himachal: हिमाचल में नशे पर सख्त कानून: संगठित अपराध रोकने के लिए नया विधेयक पेश

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में नशे की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए सख्त कानून लाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 पेश किया, जिसमें नशे की तस्करी में संलिप्त लोगों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। विधेयक पारित होने के बाद, नशा तस्करों को मृत्युदंड से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। साथ ही, उन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

विधेयक में नशे की तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सरकार 14 दिन का नोटिस जारीकर संपत्ति कुर्क कर सकेगी। इसके अलावा, नशीली दवाओं के परिवहन, आपूर्ति और रखने पर भी सजा का प्रावधान किया गया है। यह कानून सिर्फ नशा तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध खनन, वन्य जीवों की तस्करी, मानव तस्करी, झूठे दस्तावेजों का उपयोग, मानव अंगों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग और बौद्धिक संपत्तियों की जालसाजी जैसे अपराधों को भी इसके दायरे में लाया गया है।

सरकार ने नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास के लिए भी एक अलग विधेयक पेश किया है। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने हिमाचल प्रदेश मादक पदार्थ एवं नियंत्रित पदार्थ (निवारण, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक, 2025 को सदन में पेश किया। इस विधेयक के तहत पुनर्वास केंद्र खोलने की अनुमति दी गई है, जिनका संचालन सरकार करेगी। इन केंद्रों के लिए अनुदान, CSR फंड, केंद्र और राज्य सरकार की सहायता से धन का प्रावधान किया जाएगा। पुनर्वास केंद्रों के वित्तीय लेन-देन का महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट किया जाएगा।

नए विधेयक के अनुसार नशीले पदार्थों की मात्रा के आधार पर सजा तय की गई है। अल्प मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर 2 से 5 वर्ष की सजा और 20 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अधिक मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर 5 से 7 वर्ष की सजा और 50 हजार से 1 लाख रुपये तक जुर्माना होगा। वहीं, वाणिज्यिक मात्रा में नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर 10 से 15 वर्ष की कैद और 1 से 2 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

अगर कोई लोक सेवक नशीले पदार्थों के साथ पकड़ा जाता है, तो उसे तय सजा से डेढ़ गुना अधिक सजा और उतना ही अधिक जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं के पकड़े जाने पर उन्हें भी लोक सेवकों की तरह ही सजा और जुर्माना देना होगा।

विधानसभा में चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सख्त कानूनों से राज्य में नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा और संगठित अपराधों पर भी रोक लगेगी।

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