शाहपुर। प्रसिद्ध साहित्यकार रमेश मस्ताना की सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में अब उनके बेटे प्रियांकुर ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया है कि उनके पिता को टक्कर मारने वाली इनोवा क्रिस्टा का नंबर HP 01 D 8732 है और हादसे के समय गाड़ी चला रहा व्यक्ति नशे में था। बेटे ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद घायल पिता को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बजाय गाड़ी में करीब एक घंटे तक इधर-उधर घुमाया गया। उन्होंने पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और परिवार का पक्ष मीडिया में प्रकाशित करने की अपील की है।

प्रियांकुर के अनुसार, 5 नवंबर 2026 को शाम करीब पांच बजे उनके पिता रमेश मस्ताना बाइक लेकर किसी निजी काम से राजोल गए थे। शाम करीब छह बजे घर लौटते समय लदवाड़ा-शाहपुर फोरलेन पर लदवाड़ा चौक से कुछ आगे पीछे से तेज रफ्तार इनोवा क्रिस्टा ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। उनका आरोप है कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि उनके पिता उछलकर सड़क किनारे जा गिरे और उनका हेलमेट भी खुल गया। उन्होंने बताया कि गाड़ी के आगे के दोनों एयरबैग खुल गए थे और बाइक का पिछला टायर भी टक्कर के कारण जाम हो गया था।
बेटे ने बताया कि हादसे के बाद कार सवार लोगों ने उनके पिता को गाड़ी की पिछली सीट पर लिटाया और वहां से चले गए। इसी दौरान परिवार को सूचना मिली कि रमेश मस्ताना का फोरलेन पर एक्सीडेंट हुआ है और उन्हें शाहपुर अस्पताल ले जाया गया है। प्रियांकुर के मुताबिक, परिवार शाम करीब 6:30 बजे घर से निकला और महज 10 मिनट में शाहपुर अस्पताल पहुंच गया, लेकिन वहां उन्हें बताया गया कि इस तरह का कोई एक्सीडेंट केस अस्पताल में नहीं आया है। इसके बाद टांडा अस्पताल में भी पता किया गया, जहां से भी ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली।
प्रियांकुर के अनुसार, इसके बाद वह अपने भाई और माता के साथ शाहपुर के एक निजी अस्पताल की ओर जा रहे थे। इसी दौरान शाहपुर अस्पताल के गेट से करीब 50 मीटर आगे हाईवे की तरफ उन्हें वही इनोवा क्रिस्टा टूटी हुई हालत में आती दिखाई दी, जिसका नंबर HP 01 D 8732 था। उन्होंने गाड़ी रुकवाई तो कंडक्टर साइड से एक व्यक्ति बाहर आया, जो उनके आरोप के मुताबिक अत्यधिक नशे में था और ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था।
उन्होंने बताया कि जब परिवार ने ड्राइवर से पीछे का दरवाजा खोलने को कहा तो उसने न तो दरवाजा खोला और न ही शीशा नीचे किया। पीछे की सीट पर देखने पर उन्हें अपने पिता लेटे हुए दिखाई दिए। परिवार ने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह अंदर से लॉक था। आरोप है कि इसके बाद ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और उनके पिता को लेकर शाहपुर गैस एजेंसी की तरफ निकल गया।
प्रियांकुर ने बताया कि परिवार ने दोबारा गाड़ी का पीछा किया और आर्मी कैंटीन के पास स्थित चौक पर उसे रोकने की कोशिश की, जहां से शाहपुर स्कूल की ओर रास्ता जाता है। उनका आरोप है कि चालक ने वहां भी गाड़ी नहीं रोकी और उनके ऊपर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया। इसी बीच सामने से दो गाड़ियां आ जाने के कारण इनोवा आगे नहीं बढ़ सकी। मौके का फायदा उठाकर उन्होंने कंडक्टर साइड का दरवाजा खोला और अपने भाई के साथ मिलकर पिता को पिछली सीट से बाहर निकाला। इसके बाद दोनों उन्हें अपनी गाड़ी में लेकर शाहपुर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रियांकुर का आरोप है कि परिवार ने पुलिस को घटना की जानकारी पहले ही दे दी थी और पुलिस को यह भी पता था कि इनोवा को रोक लिया गया है। इसके बावजूद करीब एक घंटे तक गाड़ी को कब्जे में नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि रात में पुलिस ने गाड़ी बरामद की। जब परिवार ने गाड़ी में सवार लोगों के चेहरे देखने की मांग की तो शुरुआत में पुलिसकर्मी टालमटोल करते रहे, लेकिन बाद में तीनों व्यक्तियों के चेहरे दिखाए गए।

बेटे ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने और उनके भाई ने पिता को इनोवा से बाहर निकाला था, उस समय गाड़ी कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा था। वहीं, पुलिस की ओर से बताया गया कि गाड़ी में तीसरा व्यक्ति भी मौजूद था और उसी ने गाड़ी चलाने की बात कही थी। प्रियांकुर के अनुसार, इस व्यक्ति ने भी काफी नशा किया हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके सामने केवल उस व्यक्ति का मेडिकल करवाया, जिसे हादसे के समय गाड़ी चलाने वाला बताया गया, जबकि घायल रमेश मस्ताना को गाड़ी में लेकर जाने वाले व्यक्ति का मेडिकल नहीं करवाया गया।
प्रियांकुर ने आशंका जताई कि यदि परिवार समय पर मौके पर नहीं पहुंचता तो आरोपी उनके पिता को किसी सुनसान जगह पर ले जाकर छोड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि जिस रास्ते पर गाड़ी जा रही थी, वह काफी सुनसान इलाका है और वहां घायल व्यक्ति को छोड़कर आसानी से फरार हुआ जा सकता था। उनका यह भी आरोप है कि दुर्घटना के बाद उनके पिता को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने इसी देरी और घायल पिता को करीब एक घंटे तक गाड़ी में घुमाए जाने को मामले का बेहद गंभीर पहलू बताया है।
प्रियांकुर ने लोगों से अपील की है कि उनकी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा साझा किया जाए। उन्होंने बताया कि पोस्ट के साथ तीनों व्यक्तियों की तस्वीरें, गाड़ी की नंबर प्लेट सहित फोटो और उनके पिता की बाइक की तस्वीर भी साझा की जा रही है। उनके मुताबिक, इन तस्वीरों से टक्कर की गंभीरता और बाइक को हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से आग्रह किया है कि उनके दुखी और शोकग्रस्त परिवार का पक्ष भी प्रमुखता से सामने रखा जाए।
यह पूरा घटनाक्रम रमेश मस्ताना के बेटे प्रियांकुर की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए बयान और आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।


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