कांगड़ा जिले में घट्टा टोल प्लाजा को हटाने की मांग ने शुक्रवार को जोर पकड़ लिया। रानीताल के पास स्थानीय लोगों ने टोल टैक्स में बढ़ोतरी और आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान करीब दो घंटे तक चक्का जाम रखा गया। प्रदर्शन के चलते नेशनल हाईवे पर कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम में आम लोगों के साथ एंबुलेंस भी फंस गई, जिससे यातायात व्यवस्था पर आंदोलन का असर साफ नजर आया।

घट्टा टोल प्लाजा हटाने के लिए प्रदर्शन
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिलाएं, युवा, पंचायत प्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर घट्टा टोल प्लाजा को यहां से हटाने की मांग उठाई। लोगों का कहना था कि इससे चंगर क्षेत्र और आसपास के इलाकों के निवासियों को रोजाना टोल टैक्स के बोझ से राहत मिलेगी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामों, अस्पताल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बार-बार इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर बार टोल टैक्स चुकाना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है।
लोगों के समर्थन में पहुंचे राजनीतिक नेता
प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे विधायक पवन काजल, हिमाचल पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष अजय वर्मा, भाजपा नेता मनीष शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों की मांग का समर्थन किया। नेताओं ने कहा कि यदि क्षेत्र की जनता चाहती है कि यहां घट्टा टोल प्लाजा नहीं होना चाहिए, तो वे जनता के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाज है। इस मंच पर राजनीति नहीं होगी और जनता के हितों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
विधायक पवन काजल ने कहा, “जनता की परेशानियों को समझना और उनकी मांग को उचित मंच तक पहुंचाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। टोल प्लाजा के कारण स्थानीय लोगों को रोजाना जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। जनता जिस मांग को लेकर सड़क पर उतरी है, उसका समर्थन करना जरूरी है।”
टोल प्लाजा के कारण स्थानीय लोगों पर आर्थिक बोझ
गौरतलब है कि घट्टा टोल प्लाजा के विरोध में स्थानीय लोगों ने पहले ही 6 नवंबर को बड़े आंदोलन का ऐलान किया था। इसके लिए घट्टा टोल प्लाजा संघर्ष समिति का गठन कर लोगों को एकजुट किया गया था।
समिति का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे चंगर क्षेत्र और आसपास के लोगों की सामूहिक लड़ाई है। समिति के सदस्यों के मुताबिक, देहरा और अन्य क्षेत्रों की ओर आने-जाने वाले लोगों को भी इस टोल प्लाजा के कारण आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। ऐसे में टोल प्लाजा को यहां से हटाना ही इसका स्थायी समाधान है।

स्थानीय निवासियों को मिलेगी पास की सुविधा
वहीं, टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए मासिक और सालाना पास की सुविधा भी चर्चा में है। इसका लाभ ऐसे स्थानीय वाहन मालिक उठा सकते हैं, जिनके निजी गैर-व्यावसायिक वाहनों पर वैध और सक्रिय फास्टैग लगा हो। वाहन चालक अपनी जरूरत के अनुसार मासिक या सालाना पास का विकल्प चुन सकते हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पास की सुविधा से उनकी मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। उनकी मुख्य मांग घट्टा टोल प्लाजा को यहां से हटाने की है।
‘जब तक फैसला नहीं, जारी रहेगा आंदोलन’
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है। लोगों का कहना है कि यह केवल टोल दरों में राहत का मामला नहीं है, बल्कि स्थानीय निवासियों की रोजमर्रा की आवाजाही और आर्थिक हितों से जुड़ा मुद्दा है।
अब सभी की नजरें प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


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