कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश लोगों के लिए आफत बनती जा रही है। जिला कांगड़ा इस बार सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है। शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए, वहीं अब जवाली उपमंडल की नियांगल पंचायत के मियोली गांव पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यहां जमोला पहाड़ी लगातार दरक रही है और ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, नाले का बहाव बदलने के बाद जमोला पहाड़ी से लगातार मलबा आ रहा है, जिससे गांव में दहशत का माहौल है। मलबे की चपेट में आने से सागर सिंह की गौशाला और प्यारू राम का स्लेटपोश मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा करीब 15 कनाल उपजाऊ कृषि भूमि भी बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गई, जिससे मक्की और धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। दो दिन पहले इसी पहाड़ी से आए फ्लैश फ्लड ने इलाके में भारी तबाही मचाई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि मलबे के साथ आए कीचड़, पत्थर, रेत और पेड़-पौधे घरों और पशुशालाओं तक पहुंच गए थे। कई परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार छह मकान गिरने की कगार पर हैं, जबकि नौ अन्य घर भी खतरे की जद में आ चुके हैं। कुल मिलाकर 15 परिवारों पर संकट बना हुआ है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय पटवारी के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया और जेसीबी मशीन लगाकर नाले को अस्थायी रूप से गहरा किया, ताकि पानी का बहाव सुचारू हो सके। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है और अगली बारिश में फिर से वही हालात बन सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियांगल पंचायत की जमोला घाटी में यह समस्या नई नहीं है। वर्ष 2023 से लगातार पहाड़ी खिसक रही है और हर मानसून में लोगों को जान-माल के नुकसान का डर सताता रहता है। नवनिर्वाचित वार्ड सदस्य मदन लाल ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से गरीब जनजातीय परिवार अपने बच्चों और परिजनों के साथ हर बारिश में मौत के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, जिलाधीश कांगड़ा और एसडीएम जवाली से कई बार वैज्ञानिक तरीके से पहाड़ी के स्थायी उपचार की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि हर बार बारिश के बाद कुछ घंटों के लिए जेसीबी लगाकर मलबा हटाने तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है।

पंचायत उपप्रधान डॉ. कुलदीप सिंह ने भी कहा कि प्रशासन की ओर से नाले को गहरा कर कुछ राहत जरूर दी गई है, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है। प्रभावित परिवारों में मदन लाल, चैन सिंह, किरु राम, पवन सिंह, सागर सिंह, कृष्ण चंद, संजीव कुमार, गार्ड सिंह, बबली देवी और चंचलो देवी सहित अन्य लोगों ने सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि वे हर पल भय के माहौल में जी रहे हैं और उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
नियांगल पंचायत की प्रधान शीला देवी और बीडीसी सदस्य दविंद्र बंटी ने जिलाधीश कांगड़ा से स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। पंचायत सचिव हरबंस लाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से क्षेत्र की स्थिति पर लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

इस मामले में एसडीएम जवाली नरेंद्र जरियाल ने कहा कि जमोला पहाड़ी लगातार खिसक रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से सभी संभव अस्थायी राहत उपाय किए जा रहे हैं। यदि हालात और गंभीर होते हैं तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अन्य स्थान पर बसाने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा जाएगा।
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