हिमाचल की सड़कें कब तक बनेंगी मौत का रास्ता? पांगी हादसे ने फिर जगाया सवाल, जानिए प्रदेश के सबसे बड़े दर्दनाक सड़क हादस

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे हर साल सैकड़ों परिवारों की खुशियां छीन रहे हैं। खासकर बरसात के मौसम में पहाड़ी सड़कें यात्रियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाती हैं। भूस्खलन, पहाड़ियों से गिरते पत्थर, सड़क धंसने और गहरी खाइयों जैसी घटनाएं हर साल कई लोगों की जान ले रही हैं। शुक्रवार को कुल्लू से पांगी जा रही एक टैक्सी पर पहाड़ी से भारी मलबा और चट्टान गिरने से 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर प्रदेश की सड़क सुरक्षा व्यवस्था और मानसून के दौरान यात्रा की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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हिमाचल में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़े सड़क हादसे सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। 18 जून 2026 को चंबा के मसरूंड में एक बोलेरो वाहन करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिर गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई। इससे पहले 11 मई 2026 को चंबा-नूरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ककीरा के पास पर्यटकों से भरी एक इनोवा दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें छह लोगों की जान चली गई। 4 मई 2026 को सिरमौर में कार के खाई में गिरने से चार लोगों की मौत हुई, जबकि 9 जनवरी 2026 को सिरमौर के शिलाई-कुपवी मार्ग पर एक निजी बस 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी, जिसमें 13 यात्रियों की मौत हो गई।

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प्रदेश के पुराने हादसे भी आज तक लोगों के जेहन में ताजा हैं। 20 जून 2024 को शिमला जिले के जुब्बल स्थित चोरी कैंची में एचआरटीसी बस पलटने से चार लोगों की जान गई थी। 20 जून 2017 को शिमला के नेरवा में एचआरटीसी बस दुर्घटना में 44 यात्रियों की मौत हुई थी। 13 अगस्त 2013 को चंबा के चुवाड़ी में निजी बस हादसे में 41 लोगों ने जान गंवाई। 3 अक्तूबर 2012 को मंडी के जोगिंद्रनगर में बस के गहरी खाई में गिरने से 46 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5 नवंबर 2012 को किन्नौर के टापरी के पास बस के सतलुज नदी में गिरने से 42 लोगों की जान चली गई। इससे पहले 2 जनवरी 2010 को बिलासपुर में निजी बस हादसे में 31 लोगों की मौत हुई थी।

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बार-बार हो रहे इन हादसों ने यह साफ कर दिया है कि मानसून के दौरान हिमाचल की पहाड़ी सड़कों पर सफर बेहद जोखिम भरा हो जाता है। विशेषज्ञ लगातार संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय, समय पर भूस्खलन की निगरानी और यात्रियों के लिए प्रभावी चेतावनी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन भी लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी एडवाइजरी का पालन करने की अपील कर रहा है।

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