Kangra: कांगड़ा में 7.8 तीव्रता के भूकंप जैसा अभ्यास, 14 उपमंडलों में मेगा मॉक ड्रिल ने परखी आपदा से निपटने की तैयारी

हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित 10वीं राज्य स्तरीय बहु-आपदा आधारित मेगा मॉक एक्सरसाइज का सोमवार को जिला कांगड़ा में सफल आयोजन किया गया। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में जिले के सभी 14 उपमंडलों में आपदा प्रबंधन तंत्र, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का व्यापक परीक्षण किया गया।

मेगा मॉक एक्सरसाइज दो चरणों में आयोजित की गई। पहले चरण में सुबह 9:14 बजे रिक्टर पैमाने पर 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया, जिसके तहत भवनों के क्षतिग्रस्त होने, लोगों के मलबे में फंसने, भूस्खलन और अन्य आपात स्थितियों का अभ्यास किया गया। सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन संचालन केंद्र सक्रिय किया गया और इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम के तहत सभी संबंधित विभागों और टीमों को तत्काल तैनात किया गया।

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अभ्यास के दौरान ज्वालाजी मंदिर में 63 श्रद्धालुओं के फंसे होने का परिदृश्य तैयार किया गया, जहां एसएसबी, एनडीआरएफ और एचपीएसडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 25 लोगों को सुरक्षित निकाला और घायलों के लिए अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किया। वहीं धर्मशाला स्थित सर्किट हाउस और आईटीआई शाहपुर के भवनों के ढहने की काल्पनिक स्थिति में फंसे 100 लोगों का सफल रेस्क्यू किया गया। आईटीआई शाहपुर में मलबे में दबे विद्यार्थियों को अग्निशमन विभाग और बचाव दलों ने सुरक्षित बाहर निकाला। जोनल अस्पताल धर्मशाला के फार्मेसी भवन के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में स्टेजिंग एरिया का संचालन कर 50 लोगों को सुरक्षित निकालकर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज नगरोटा बगवां में ग्रीन कॉरिडोर अभ्यास के तहत गंभीर रूप से घायलों को शीघ्र उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और एम्बुलेंस सेवाओं के समन्वय से डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा पहुंचाया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गति और समन्वय को परखना था।

दूसरे चरण में शाम के समय आगजनी, भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया। कोतवाली बाजार रोड और मैक्लोडगंज में भूस्खलन के कारण सड़क बंद होने का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया, जहां लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी और अन्य मशीनों की सहायता से मार्ग को पुनः बहाल किया। साथ ही जिले के विभिन्न स्थानों पर आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभाग, पुलिस, होमगार्ड और एचपीएसडीआरएफ ने संयुक्त रूप से आग पर नियंत्रण, प्रभावित लोगों की निकासी और प्राथमिक उपचार का सफल प्रदर्शन किया।

सायंकालीन अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित निर्णय प्रक्रिया का भी परीक्षण किया गया, जिसे प्रभावी पाया गया। इस मेगा मॉक एक्सरसाइज में भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, विद्युत विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रशिक्षित आपदा मित्रों ने भी खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार और भीड़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

अभ्यास के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में कमांड एवं नियंत्रण व्यवस्था, विभागीय समन्वय और संचार प्रणाली को प्रभावी बताया गया। साथ ही भविष्य में वैकल्पिक उपग्रह संचार व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन यातायात मार्गों और संसाधनों की तैनाती को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। जिला प्रशासन ने इस सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी विभागों, सुरक्षा बलों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

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