Smart Meter Revolution: सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड बिजली सिस्टम शुरू, 29 हजार कार्यालयों में लागू हुई नई व्यवस्था

केंद्र सरकार की पुनर्निर्मित वितरण योजना (आरडीएसएस) के तहत राज्य के सरकारी दफ्तरों में लगाए गए स्मार्ट मीटर अब प्रीपेड प्रणाली में बदल दिए गए हैं। राज्य बिजली बोर्ड ने प्रदेश के 29 हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों में यह व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके बाद अब इन दफ्तरों में मोबाइल की तरह बिजली का रिचार्ज कर उपयोग किया जा रहा है।

इस नई व्यवस्था से सरकारी दफ्तरों में बिजली के दुरुपयोग पर रोक लगने के साथ-साथ बिजली बिलों में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। योजना के तहत प्रदेशभर में बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है। शुरुआत में बिजली बोर्ड ने अपने ही लगभग 1500 कार्यालयों में यह प्रीपेड प्रणाली लागू कर दी थी, जिसके बाद इसे पूरे राज्य के सरकारी दफ्तरों में विस्तार दिया गया।

स्मार्ट मीटरों में रियल टाइम मॉनिटरिंग, ऑनलाइन रिचार्ज, दैनिक खपत का रिकॉर्ड और अलर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे अब हर दफ्तर में बिजली खपत का सटीक डेटा मिल सकेगा और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। बिजली बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इससे राजस्व प्रबंधन भी और मजबूत होगा, क्योंकि अब पहले भुगतान और बाद में उपयोग की प्रणाली लागू हो गई है, जिससे बकाया बिलों की समस्या खत्म होने की उम्मीद है।

बिजली बोर्ड के चीफ इंजीनियर (पी एंड एम) ई. राकेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के 29 हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है।

सरकार का मानना है कि सरकारी संस्थानों में लंबे समय से बिजली की अनावश्यक खपत एक बड़ी चुनौती रही है। कई बार काम खत्म होने के बाद भी दफ्तरों में लाइटें, पंखे और अन्य उपकरण चालू रह जाते थे, जिससे बिजली की बर्बादी होती थी। अब स्मार्ट मीटर से हर यूनिट की निगरानी डिजिटल रूप से संभव होगी और विभागों को वास्तविक खपत का पूरा डेटा मिलेगा। इससे विभाग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बिजली खर्च कर सकेंगे।

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