Himachal: पंचायत चुनाव लड़ना है तो जान लें ये नियम, 6% वोट नहीं मिले तो जब्त हो जाएगी जमानत

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और इसके साथ ही उम्मीदवारों के लिए नियम भी स्पष्ट कर दिए गए हैं। चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए सिर्फ जीतना ही नहीं, बल्कि अपनी जमानत राशि बचाना भी एक बड़ी चुनौती होगी। नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को अपनी जमानत राशि सुरक्षित रखने के लिए कुल पड़े वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य होगा। अगर कोई प्रत्याशी इस सीमा से कम वोट प्राप्त करता है, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।

चुनाव आयोग द्वारा यह प्रावधान चुनाव प्रक्रिया को अधिक गंभीर और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल गंभीर और योग्य उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में उतरें। अक्सर देखा जाता है कि कई लोग सिर्फ औपचारिकता या वोटों का बंटवारा करने के लिए चुनाव लड़ते हैं। इस नियम से ऐसे उम्मीदवारों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

विभिन्न पदों के लिए जमानत राशि भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। जिला परिषद सदस्य के लिए 200 रुपए, पंचायत समिति सदस्य के लिए 150 रुपए और ग्राम पंचायत के प्रधान व उप-प्रधान पद के लिए भी 150 रुपए की जमानत राशि तय की गई है। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों को इसमें छूट दी गई है और उन्हें सामान्य वर्ग की तुलना में आधी राशि जमा करनी होगी।

इस नियम को समझने के लिए वर्ष 2012 का चमियाणा जिला परिषद चुनाव एक दिलचस्प उदाहरण माना जाता है। उस समय इस सीट पर करीब 11 उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे वोटों का काफी बंटवारा हुआ। स्थिति यह बनी कि कोई भी उम्मीदवार 6 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल नहीं कर पाया। यहां तक कि जीतने वाले उम्मीदवार को भी 6 प्रतिशत से कम वोट मिले, लेकिन नियमों के अनुसार उसे जमानत जब्ती से राहत मिल गई, जबकि बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त हो गई।

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