केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देशभर के करोड़ों टैक्सपेयर्स की निगाहें टिकी हुई हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज रविवार, 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। इस बार का बजट खास माना जा रहा है, क्योंकि यह नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत पेश किया जाने वाला पहला बजट होगा, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है।
मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं को इस बजट से बड़ी राहत की उम्मीद है। बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और आवास लागत के बीच टैक्स ढांचे में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है। सबसे बड़ी मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की है। इसके अलावा, नए टैक्स रिजीम में 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब की सीमा को 24 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये तक ले जाने की मांग भी की जा रही है, ताकि मौजूदा आय स्तर और जीवनयापन की लागत के अनुरूप टैक्स ढांचा बन सके।
हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर भी बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है। होम लोन पर ब्याज कटौती की सीमा, जो अभी धारा 24(b) के तहत 2 लाख रुपये है, उसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है। साथ ही, एचआरए की सीमा बढ़ाने और मेट्रो शहरों की सूची का विस्तार करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई को बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सके।
निवेश और कैपिटल गेन टैक्स को लेकर भी बड़े बदलावों की उम्मीद है। लंबे समय के पूंजीगत लाभ पर छूट की सीमा को 1.25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग सबसे प्रमुख है। इसके अलावा, रियल एस्टेट और डेट फंड्स पर इंडेक्सेशन लाभ दोबारा बहाल करने की भी मांग उठ रही है, खासकर वरिष्ठ नागरिकों और लंबे समय के निवेशकों के लिए।
सीनियर सिटिजन्स के लिए भी टैक्स राहत की उम्मीदें हैं। ब्याज आय पर छूट की सीमा को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग टैक्स स्लैब और धारा 87A के तहत रिबेट को लेकर स्पष्टता की भी मांग है। स्वास्थ्य बीमा पर धारा 80D के तहत कटौती की सीमा को वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग भी तेज है, ताकि मेडिकल महंगाई का बोझ कुछ कम हो सके।
मध्यम वर्ग की एक और बड़ी मांग है कि स्वास्थ्य बीमा और एनपीएस में निवेश पर मिलने वाले टैक्स लाभों को नए टैक्स रिजीम में भी शामिल किया जाए। इससे लंबी अवधि की रिटायरमेंट प्लानिंग और स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि अब 72 प्रतिशत से ज्यादा करदाता नए टैक्स रिजीम को अपना चुके हैं, इसलिए सरकार पुराने टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में कदम उठा सकती है। हालांकि, इस बजट में बड़े टैक्स रेट बदलावों के बजाय टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और भरोसे पर आधारित बनाने पर ज्यादा फोकस रहने की संभावना है।
नया टैक्स रिजीम (वर्तमान स्लैब):
0 से 4 लाख रुपये तक आय पर कोई टैक्स नहीं है।
4 लाख से 8 लाख रुपये तक 5 प्रतिशत टैक्स लागू है।
8 लाख से 12 लाख रुपये तक 10 प्रतिशत टैक्स देना होता है।
12 लाख से 16 लाख रुपये तक 15 प्रतिशत टैक्स लगता है।
16 लाख से 20 लाख रुपये तक 20 प्रतिशत टैक्स है।
20 लाख से 24 लाख रुपये तक 25 प्रतिशत टैक्स लागू है।
24 लाख रुपये से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है।
पुराना टैक्स रिजीम:
2.5 लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है।
2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक 5 प्रतिशत टैक्स है।
5 लाख से 10 लाख रुपये तक 20 प्रतिशत टैक्स लागू है।
10 लाख रुपये से अधिक आय पर 30 प्रतिशत टैक्स देना होता है।
Budget 2026 कहां और कैसे देखें:
बजट का सीधा प्रसारण संसद टीवी और डीडी न्यूज पर किया जाएगा। इसके अलावा PIB इंडिया के यूट्यूब चैनल और इकोनॉमिक टाइम्स वेबसाइट पर भी लाइव अपडेट और विश्लेषण उपलब्ध रहेगा।
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