राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र लाहौल-स्पीति में लगातार ठोस कचरा डंप किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। एनजीटी ने चेतावनी दी है कि चंद्रा नदी के कैचमेंट क्षेत्र में बार-बार कचरा फेंकने से यह हिमनद आधारित महत्वपूर्ण नदी गंभीर खतरे में पड़ गई है।
पर्यावरण संगठन ‘फ्रेंड्स’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान एनजीटी ने निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केलांग के पास शाकस और बिलिंग नालों में पहाड़ी ढलानों और नालों के किनारे बड़े पैमाने पर कचरा डाला जा रहा है। प्लास्टिक और अन्य गैर-जैव अपघटनीय कचरा बर्फ पिघलने और बारिश के दौरान आसानी से चंद्रा नदी में बह सकता है। अधिकरण ने सिस्सू-कोकसर सड़क और अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के पास भी कचरे के ढेर लगे होने की बात कही। वहां की साइड ड्रेनों के जरिए यह कचरा स्थानीय जलधाराओं में पहुंच रहा है, जो आगे चलकर नदी प्रणाली से जुड़ जाती हैं।
एनजीटी ने बिलिंग स्थित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार यह सुविधा क्षमता से अधिक भरी हुई है, वहां वेटब्रिज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और कचरा प्रसंस्करण व निपटान से जुड़े कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखे जा रहे हैं। इसके अलावा एनजीटी ने पाया कि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण केलांग ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत जरूरी उपविधियां अब तक नहीं बनाई हैं और न ही घर-घर कचरा संग्रहण के लिए उपयोगकर्ता शुल्क अधिसूचित किया गया है।
अधिकरण ने साफ कहा कि उसके पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद इस दिशा में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने केलांग के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट को आदेश दिए हैं कि वे 15 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से पहले शपथपत्र के साथ विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश करें।
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