देवभूमि कुल्लू में इन दिनों आस्था और परंपरा का विशेष दौर चल रहा है। जिले के कई देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर रवाना हो गए हैं। सोमवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के बाद देवालयों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। मान्यता है कि देवी-देवता प्रजा की भलाई और आगामी वर्ष की खुशहाली के लिए स्वर्ग जाकर देवराज इंद्र के साथ मंत्रणा करते हैं।
पौष संक्रांति के अवसर पर कुल्लू जिले के अधिकांश देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर जाते हैं, ताकि आने वाला वर्ष हारियान क्षेत्र के लोगों के लिए सुख-समृद्धि लेकर आए। वहीं, कुछ देवी-देवता माघ संक्रांति के दिन स्वर्ग के लिए प्रस्थान करते हैं। स्वर्ग प्रवास से लौटने के बाद देवी-देवता अपने गुरों के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं और अन्य घटनाओं को लेकर लोगों को संदेश भी देते हैं।
देवलुओं के अनुसार, देवभूमि कुल्लू में करीब 250 देवी-देवता स्वर्ग की ओर रवाना हो चुके हैं और उनके देवालयों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जो देवी-देवता अभी धरती पर विराजमान हैं, वे अपने भक्तों के घर जाकर उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।
देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने के बाद घाटी में आसुरी शक्तियों के प्रभाव के बढ़ने की मान्यता भी जुड़ी हुई है। इसी कारण कई देवी-देवता स्वर्ग रवाना होने से पहले अपने भक्तों को सरसों और चावल के दाने आशीर्वाद स्वरूप देते हैं, ताकि लोग बुरी शक्तियों से सुरक्षित रहें। पौष माह के दौरान घाटी के कई क्षेत्रों में दियाली उत्सव भी मनाया जाता है, जिसमें मशालें जलाकर और परंपरागत तरीकों से बुरी शक्तियों को भगाने की रस्म निभाई जाती है।
देवताओं के स्वर्ग प्रवास पर जाने के बाद संबंधित क्षेत्रों में धार्मिक कार्यक्रमों पर अस्थायी रोक लग जाती है। इस दौरान लोग अपने घरों में विवाह, मुंडन संस्कार और अन्य शुभ धार्मिक कार्य नहीं करते हैं। ऐसे में लोगों के मन में देवी-देवताओं की वापसी को लेकर एक तरह की प्रतीक्षा और भावनात्मक खालीपन रहता है। स्वर्ग से देवताओं की वापसी के बाद ही धार्मिक आयोजनों की परंपरा दोबारा शुरू होती है।
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