जिला मुख्यालय स्थित चंडीगढ़-धर्मशाला नेशनल हाईवे पर निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। पिछले सप्ताह हाईवे पर की गई टारिंग घटिया गुणवत्ता के कारण कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है। हालात इतने खराब हैं कि दो दिन पहले किया गया पैचवर्क भी नहीं टिक पाया, जिसके बाद स्थानीय निवासियों और दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा।
मौके पर प्रदर्शन कर रहे स्थानीय दुकानदार चंद्रभूषण, शुभम सैनी और उजागर सिंह ने आरोप लगाया कि सड़क की हालत पहले से ठीक थी और यहां नई टारिंग की कोई खास जरूरत नहीं थी। उनका कहना है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग की मिलीभगत से सरकारी बजट ठिकाने लगाने के लिए अच्छी सड़क पर घटिया सामग्री की परत चढ़ाई गई। इसका नतीजा यह हुआ कि सड़क बनने के एक हफ्ते के भीतर ही जगह-जगह से उखड़ने लगी।
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण बताते हुए कहा कि यह जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने की सीधी बर्बादी है। लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल किए गए मैटीरियल की लैब टेस्टिंग करवाई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मामला सामने आते ही एनएचएआई हरकत में आ गया है। एनएचएआई के एसडीओ राजेश शर्मा ने पुष्टि की कि निर्माण कार्य में खामियां पाई गई हैं। उन्होंने बताया कि सड़क की खराब गुणवत्ता को देखते हुए ठेकेदार के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
एसडीओ ने कहा कि सड़क की गुणवत्ता की विस्तृत जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थानीय लोग प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर रोक लगेगी।
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