प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना जरूरतमंद युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। जोगिंदर नगर उपमंडल के भजराला गांव के हंसराज और अक्षित कुमार इस योजना के ऐसे उदाहरण हैं, जिनकी जिंदगी को सरकार के सहयोग ने नई दिशा दी है। योजना के तहत न केवल उन्हें अपने घर के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता मिली, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने दोनों लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा लेंटर का कार्य पूरा होने के बाद उन्हें दो-दो लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाएगी। इस आर्थिक सहयोग से हंसराज और अक्षित कुमार अब अपने पक्के घर का सपना साकार करने की ओर बढ़ चुके हैं।
योजना के तहत सरकार दोनों युवाओं को हर माह चार-चार हजार रुपये की पॉकेट मनी भी प्रदान कर रही है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। हंसराज ने इसी योजना के तहत स्वरोजगार के लिए आवेदन किया था, जिस पर सरकार ने उन्हें 1 लाख 76 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इससे उनके व्यवसाय को मजबूती मिली है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

लाभार्थियों का कहना है कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस सहायता के चलते वे न केवल अपना घर बना पा रहे हैं, बल्कि सम्मान के साथ स्वतंत्र जीवन जीने का आत्मविश्वास भी उनमें आया है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी चौंतड़ा बालम राम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना प्रदेश सरकार की एक अहम पहल है। जोगिंदर नगर उपमंडल में अब तक चार लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की जा चुकी है। वहीं, दो लाभार्थियों को व्यवसाय के लिए कुल 3 लाख 76 हजार रुपये की सहायता दी गई है। इसके साथ ही योजना के तहत 44 बच्चों को हर माह चार-चार हजार रुपये पॉकेट मनी भी प्रदान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान उपमंडल में पांच बच्चों को अकादमिक और शैक्षणिक शिक्षा के लिए लगभग 3 लाख 78 हजार रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा पांच लाभार्थियों को विवाह के लिए कुल 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया गया है, जहां राज्य सरकार माता-पिता की भूमिका निभा रही है। यह योजना समाज के कमजोर वर्गों को संबल देने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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