हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से वैवाहिक जीवन से जुड़े दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों को हैरान कर दिया है। यहां दो अलग-अलग मामलों में अदालत ने आपसी सहमति के आधार पर तलाक को मंजूरी दी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों मामलों में पत्नियों की उम्र 75 वर्ष बताई गई है, जिससे यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है।
पहले मामले में पति-पत्नी का विवाह वर्ष 1990 में हुआ था। बीते करीब 15 वर्षों से दोनों के बीच मतभेद चल रहे थे और वे अलग रह रहे थे। कई बार सुलह की कोशिशें की गईं, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से अदालत में संयुक्त याचिका दाखिल कर वैवाहिक संबंध समाप्त करने का फैसला लिया। चूंकि इस दंपत्ति की कोई संतान नहीं है, इसलिए अदालत में यह तय हुआ कि पति अपनी मासिक पेंशन से 5,000 रुपये हर महीने पूर्व पत्नी को भरण-पोषण के लिए देगा। साथ ही, बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च भी पति ही उठाएगा।
दूसरा मामला भी उतना ही चौंकाने वाला है, जहां 75 वर्षीय पत्नी और 39 वर्षीय पति ने अलग होने का निर्णय लिया। इस दंपत्ति का विवाह वर्ष 2008 में हुआ था और इनके तीन बच्चे हैं। समझौते के अनुसार, तीनों बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि मां जब चाहे अपने बच्चों से मिल सके। दोनों के बीच जून 2021 से गंभीर मतभेद शुरू हुए थे, जिसके बाद उन्होंने साथ रहने से इनकार करते हुए अदालत में हलफनामा प्रस्तुत किया।
अदालत ने दोनों मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महिलाओं के रहने और उनकी बुनियादी जरूरतों का विशेष ध्यान रखा है। कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, पतियों को अपनी पूर्व पत्नियों को रहने के लिए अलग कमरा, रसोई और वॉशरूम की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।
इन दोनों मामलों ने सामाजिक और कानूनी हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञ इसे आपसी सहमति और सम्मानजनक शर्तों के साथ विवाह समाप्त करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मान रहे हैं।
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