हिमाचल प्रदेश की सियासत में उस समय हलचल मच गई जब प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और कांगड़ा के विधायक पवन काजल ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक बयान दिया। पवन काजल ने दावा किया कि प्रदेश की चरमराती आर्थिक स्थिति और सरकार की कार्यप्रणाली को देखते हुए हिमाचल में किसी भी समय राज्यपाल शासन लागू होने की संभावना बन सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।
गुरुवार को मटोर में आयोजित बैठक के दौरान काजल ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी सरकार ने पंचायत चुनावों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया हो। इसे उन्होंने ग्रामीण संसद के अधिकारों का हनन और लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उनके अनुसार हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देना यह दर्शाता है कि सरकार जनता का सामना करने से डर रही है।
विधायक पवन काजल ने कांग्रेस सरकार पर झूठी गारंटियों के सहारे सत्ता में आने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान शासन में हिमाचल देश का पांचवां सबसे कर्जदार राज्य बन चुका है। आरडीजी ग्रांट बंद होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय वित्त आयोग के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि फोरलेन, वंदे भारत ट्रेन, एम्स और केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे बड़े प्रोजेक्ट केंद्र की मोदी सरकार की देन हैं और अपनी विफलताओं के लिए केंद्र सरकार को दोष देना उचित नहीं है।
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