Solan: नौणी यूनिवर्सिटी में बड़ा एक्शन: प्रोबेशन पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर की सीधी बर्खास्तगी

डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (सोलन) प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए जिला सिरमौर के धौलाकुआं स्थित क्षेत्रीय उद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में प्रोबेशन पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर (प्लांट फिजियोलॉजी) डॉ. संजीव कुमार सन्याल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह कार्रवाई प्रोबेशन अवधि के दौरान उनके कार्य और आचरण को असंतोषजनक पाए जाने सहित अन्य गंभीर कारणों के चलते की है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के उपकुलपति की ओर से लिखित आदेश जारी किए गए हैं। इससे पहले डॉ. सन्याल को निलंबित भी किया जा चुका था, लेकिन अब उनके खिलाफ सीधी बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है।

आदेशों के अनुसार यह फैसला विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट-कम-नियुक्ति प्राधिकारी की हाल ही में हुई 121वीं बैठक में लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रोबेशन अवधि के दौरान डॉ. संजीव कुमार सन्याल का कार्य और आचरण संतोषजनक नहीं पाया गया। उन पर उच्च अधिकारियों के वैध आदेशों की अवहेलना, निराधार और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने, अनुशासनहीनता और अवज्ञा जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन कारणों से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुसंधान माहौल पर नकारात्मक असर पड़ा, जिसके चलते उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

आदेश में बताया गया है कि डॉ. संजीव कुमार सन्याल की नियुक्ति 29 जनवरी 2021 को 30,600 रुपये मासिक मानदेय पर कांट्रैक्ट आधार पर की गई थी। बाद में राज्य सरकार की नीति के तहत 7 जून 2024 को उनकी सेवाएं नियमित की गईं और उन्हें दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि पर रखा गया, जो 6 जून 2026 तक निर्धारित थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक प्रोबेशन के दौरान उनके खिलाफ दो अलग-अलग चार्जशीट जारी की गई थीं। इसके बाद 13 फरवरी 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया, जो समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा और वह वर्तमान में भी निलंबन में थे। उनके खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत विभागीय जांच करवाई गई, जिसमें सभी आरोप प्रमाणित पाए गए।

प्रशासन ने यह भी बताया कि डॉ. संजीव कुमार सन्याल ने निलंबन और चार्जशीट के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में तीन बार याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्होंने किसी भी विभागीय जांच में हिस्सा नहीं लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे उनके अवज्ञाकारी और बाधक रवैये के रूप में देखा।

आदेश में विश्वविद्यालय के प्रोबेशन नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि प्रोबेशन अवधि के दौरान किसी कर्मचारी का कार्य और आचरण संतोषजनक न हो, तो उसकी सेवाएं बिना नोटिस समाप्त की जा सकती हैं और इसे दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जाता। इसी आधार पर यह फैसला लिया गया।

हालांकि नियमों के अनुसार डॉ. संजीव कुमार सन्याल को एक माह के वेतन और भत्तों के बराबर राशि का भुगतान किया जाएगा, जो उन्हें आदेश की तिथि से पहले मिल रही थी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई संस्थान में अनुशासन, कार्य संस्कृति और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

उपकुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि धौलाकुआं स्थित क्षेत्रीय उद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में कार्यरत प्रोबेशनरी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार सन्याल को बर्खास्त किया गया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट-कम-नियुक्ति प्राधिकारी की बैठक में लिया गया है और इस संबंध में लिखित आदेश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई असिस्टेंट प्रोफेसर के कार्य और आचरण को असंतोषजनक पाए जाने के चलते की गई है।

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