Hamirpur: 8 साल में 11 लाख लोगों का इलाज, अब AI तकनीक से लैस हुई सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा

सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रयास संस्था के सहयोग से संचालित सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा ने मंगलवार को अपनी 8 वर्षों की सफल यात्रा पूरी कर ली। अब यह सेवा जनसेवा के 9वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और इसे और आधुनिक बनाने की दिशा में नई एआई तकनीकों को जोड़ा गया है। अवाह देवी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हेल्थ एटीएम, हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन और ब्रैस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मशीन जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं को जनता को समर्पित किया गया। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर, विधायक इन्द्रदत्त लखनपाल और आशीष शर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व विधायक कमलेश कुमारी, भाजपा नेता रजत ठाकुर, वंदना गुलेरिया और अन्य कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अनुराग ठाकुर ने बताया कि इस सेवा की शुरुआत 14 अप्रैल 2018 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर केवल 3 मोबाइल मेडिकल यूनिट के साथ की गई थी, जो आज बढ़कर 32 यूनिट हो चुकी हैं। अब तक यह सेवा 8 जिलों में 25,000 से अधिक स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 11 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी यह सेवा घर-घर पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती रहेगी।

नई जोड़ी गई तकनीकों की बात करें तो हेल्थ एटीएम मात्र 10 से 12 मिनट में 60 से अधिक क्लीनिकल पैरामीटर्स की जांच कर सकता है, जिससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का शुरुआती पता लगाया जा सकता है। वहीं, हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन एआई आधारित हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग के जरिए सिर्फ 2 सेकंड में रिपोर्ट उपलब्ध कराती है और टीबी सहित फेफड़ों की बीमारियों की पहचान में मदद करती है। ब्रैस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मशीन पूरी तरह रेडिएशन-मुक्त और नॉन-कॉन्टैक्ट तकनीक पर आधारित है, जो 12 से 15 मिनट में जांच कर जोखिम का आकलन करती है।

सेवा के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 8 वर्षों में मोबाइल यूनिट्स ने 9,21,000 किलोमीटर की दूरी तय की है और 25,000 शिविरों के माध्यम से 3,41,278 से अधिक जांचें की गई हैं। इस दौरान कुल 11,52,681 लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में नेत्र जांच, मल्टी-स्पेशियलिटी और कैंसर जांच शिविरों का भी आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी सबसे अधिक रही। मरीजों को मुफ्त दवाइयां और चश्मे भी उपलब्ध कराए गए। प्रत्येक यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब तकनीशियन और पायलट की टीम होती है, जो लगभग 40 प्रकार के मेडिकल टेस्ट करने में सक्षम है। खास बात यह है कि इस सेवा में लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं।

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