Mandi: दरिंदगी के आरोपी को नहीं मिली राहत! कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला, जमानत याचिका खारिज

मंडी में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 की अदालत ने एक गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सदर क्षेत्र के एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी पर 40 वर्षीय मानसिक रूप से अक्षम महिला के साथ दरिंदगी करने का आरोप है। पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद आरोपी ने जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत देने से इनकार कर दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 13 जनवरी की है। बताया गया कि जब आरोपी इस घिनौने कृत्य को अंजाम दे रहा था, उसी दौरान एक स्थानीय व्यक्ति ने उसे देख लिया और शोर मचा दिया। खुद को पकड़े जाने से बचाने के लिए आरोपी मौके से फरार हो गया। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने पीड़िता को बदहवास और रोते हुए पाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सुनवाई के दौरान बचाव और अभियोजन पक्ष के बीच तीखी बहस हुई। आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और वह लंबे समय से जेल में है। उन्होंने यह भी कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में सीमेन नहीं पाया गया है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य की ओर से इसका कड़ा विरोध किया गया और कहा गया कि यह बेहद गंभीर और जघन्य अपराध है। अभियोजन पक्ष ने यह भी आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत मिलती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही वैज्ञानिक साक्ष्यों में कुछ तकनीकी कमी हो, लेकिन चश्मदीद गवाह और पीड़िता के बयान इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने यह भी माना कि मानसिक रूप से दिव्यांग महिला के साथ किया गया यह अपराध समाज के लिए बेहद गंभीर है और इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। इसी आधार पर जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।

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